बटर चिकन और दाल मखनी दो ऐसे व्यंजन हैं जो सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में लोकप्रिय हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि इन व्यंजनों के आविष्कार को लेकर राजधानी दिल्ली में एक अनोखी जंग छिड़ गई है। दो प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट इन स्वादिष्ट व्यंजनों के आविष्कार का श्रेय को अपना-अपना नाम दे रहे हैं और मामला इतना बढ़ गया है कि यह दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। दरियागंज रेस्तरां श्रृंखला ने ‘बटर चिकन’ की उत्पत्ति को लेकर मोती महल के मालिकों द्वारा कुछ कथित अपमानजनक टिप्पणियों के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। मोती महल के मालिकों यह दावा करते हुए मुकदमा दायर किया कि 1947 में कुंदन लाल गुजराल ने‘बटर चिकन’ और ‘दाल मखनी’ का आविष्कार किया था जबकि दरियागंज के रेस्टोरेंट का कहना है कि इन व्यंजनों का संबंध पेशावर से है।
मोती महल का आरोप है कि दरियागंज रेस्तरां दोनों रेस्तरांओं के बीच आपसी तालमेल होने का भ्रम फैला रहा है और दरियागंज रेस्टोरेंटने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। आपको बता दें मोती महल के मालिकों ने एक इंटरव्यू में कथित रूप से ‘अपमानजनक’ टिप्पणी की थी और इसका ही विरोध दरियागंज कर रहा है। मोती महल रेस्तरां का दावा है कि उनके पूर्ववर्ती स्वर्गीय कुंदन लाल गुजराल ने बटर चिकन और दाल मखनी की रेसिपी बनाई थी और दरियागंज इन व्यंजनों की असली आविष्कार के बारे में लोगों को गुमराह कर रहा है। वहीं दरियागंज रेस्तरां श्रृंखला ने तर्क दिया है कि लेख में प्रकाशित टिप्पणी उनकी प्रतिष्ठा पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहें हैं।
न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने मोती महल के मालिकों को निर्देश दिया कि वह एक हलफनामा दाखिल करें दावे के बारे में विस्तार से बताया गया हो कथित बयान से खुद को अलग करने के अपने प्रयास की पुष्टि की गई हो। आपको बता दें इस साल की शुरुआत में ही मोती महल ने दरियागंज के खिलाफ मुकदमा दायर किया था और आरोप लगाया गया था कि दरियागंज इन व्यंजनों का श्रेय ले रहा है। इस मामले की सुनवाई 29 मई को होगी। अब ये देखना बहुत ही दिलचस्प होगा कि कोर्ट किसके पक्ष में फैसला सुनाएगा।