Cycle Rickshaw: यूरोपियन शैली में बने नैनीताल की विरासत, संस्कृति और तौर तरीकों की बात ही अलग है।इन्हीं से जुड़ा हुआ है यहां चलने वाले साईकिल रिक्शों की कहानी। शहर के माल रोड पर करीब 81 वर्षों से साईकिल रिक्शे दौड़ रहे हैं। जोकि तल्लीताल से मल्लीताल को जोड़ते हैं। जल्द ही इनका संचालन यहां पूरी तरह से बंद हो जाएगा।साल 1942 में 1 आने के किराये से शुरू हुए सवारी रिक्शों का किराया आज 20 रुपये तक पहुंच चुका है।

Cycle Rickshaw:जानिए इनके बंद होने की वजह
Cycle Rickshaw: हाल में नैनीताल हाईकोर्ट ने यहां लगातार बढ़ते यातायात जाम को देखते हुए दो सप्ताह के अंदर साईकिल रिक्शों को बंद करने के आदेश दिए हैं।
इनके स्थान पर यहां 50 नए ई-रिक्शा उतारने को कहा है।
Cycle Rickshaw: अंग्रेजों ने की थी शुरुआत
Cycle Rickshaw: जानकारी के अनुसार अंग्रेजों ने 1846 में नैनीताल में पर्यटन की शुरुआत की थी।इस दौरान यहां सामान ढोने के लिए कुली जबकि आवागमन के लिए घोड़े गाड़ी की शुरुआत की गई।करीब 3 किलोमीटर लंबी मॉल रोड पर सवारियों को तल्लीताल से मल्लीताल तक ले जाने के लिए 1858 में झंपानी की शुरुआत हुई।उस दौरान इसे हाथ रिक्शा, राम रथ और विलियम एंड बरेली टाइप पुकारा जाता था।यह क्रम 1941 तक जारी रहा। जब अंग्रेज अपने साथ साइकिल भारत लाए, तब 1942 में हाथ रिक्शा की जगह साइकिल या पैडल रिक्शे ने ले ली।
Cycle Rickshaw: पं.नेहरू भी कर चुके रिक्शे की सवारी

जानकारी के अनुसार देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू के अलावा बॉलीवुड और राजनीतिक जगत से जुड़ी कई हस्तियां रिक्शे की सवारी कर चुकीं हैं।
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