ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप की रजत विजेता भारत की पीवी सिंधु ने फाइनल में हारने की प्रेतबाधा से आखिर मुक्ति पाते हुए साल के अंतिम बैडमिंटन टूर्नामेंट वर्ल्ड टूर फाइनल्स में रविवार को खिताब जीतकर नया इतिहास रच दिया। सिंधु यह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय बन गयी हैं। भारत की स्टार सिंधु ने फाइनल मुकाबले में दूसरी वरीयता प्राप्त जापान की निजोमी ओकुहारा को एक घंटे दो मिनट में 21-19, 21-17 से हराकर खिताब जीता। सिंधु का 2018 में यह पहला खिताब है और इस तरह उन्होंने साल का समापन खिताब के साथ कर लिया।

विश्व रैंकिंग में छठे नंबर की सिंधु ने पांचवीं रैंकिंग की ओकुहारा के खिलाफ अपना रिकॉर्ड अब 7-6 का लिया है। सिंधु ने इस जीत के साथ लगातार कई फाइनल हारने और चोकर्स के ठप्पे से मुक्ति पा ली है। सिंधु ने अपने खिताबी सफर के दौरान विश्व की नंबर एक खिलाड़ी ताइपे की ताई जू यिंग को पराजित किया था। सिंधु को 2016 रियो ओलंपिक, 2017 विश्व चैंपियनशिप, 2017 वर्ल्ड टूर फाइनल्स, 2018 राष्ट्रमंडल खेल, 2018 विश्व चैंपियनशिप और 2018 जकार्ता एशियाई खेलों के फाइनल में हार मिली थी और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। लेकिन अब सिंधु ने इतिहास रच सभी भारतीयों को गौरवान्वित कर दिया।

सिंधु पिछले साल इस टूर्नामेंट के खिताबी मुकाबले में हार गयी थीं लेकिन दूसरी सीड खिलाड़ी के सामने उन्होंने इस बार कोई गलती नहीं की और खिताब जीत कर ही दम लिया। खिताब जीत कर बेहद प्रसन्न नजर आ रहीं सिंधु ने इस जीत का जश्न आंसुओं के बीच मनाया। उन्होंने वह कारनामा कर दिखाया जो अब तक कोई भारतीय नहीं कर पाया था। समीर वर्मा के पुरुष सेमीफाइनल में हार जाने के बाद सिंधू से पूरी उम्मीद थी कि वह इस बार खिताब को अपने हाथों से नहीं फिसलने देंगी और उन्होंने ओकुहारा से पिछले साल विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में मिली हार का हिसाब चुका लिया।

23 वर्षीय सिंधु ने मुकाबले में शानदार शुरुआत हुए 11-6 की बढ़त हासिल कर ली। ओकुहारा ने फिर शानदार वापसी करते हुए स्कोर को 15-13 कर दिया। कुछ देर बाद स्कोर 17-17 हो गया। लेकिन सिंधु ने संयम दिखाते हुए अंक लिए और स्कोर 20-19 पहुंचा दिया। सिंधू ने 21-19 पहला गेम जीत लिया। भारतीय खिलाड़ी ने दूसरे गेम में भी शानदार शुरुआत करते हुए 2-0 की बढ़त बना ली। दूसरे गेम में ब्रेक तक सिंधू ने 11-9 से आगे हो गयीं। सिंधू ने जापानी खिलाड़ी को वापसी करने का कोई मौका नहीं दिया और दूसरा गेम 21-17 से जीतकर खिताब अपने नाम कर लिया। इससे पहले सायना नेहवाल 2011 में विश्व सुपर सीरीज फाइनल्स और जबकि 2009 में ज्वाला गुट्टा और वी दीजू की जोड़ी मिश्रित युगल में उप विजेता रही थी।

साभार, ईएनसी टाईम्स

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