उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन की साक्षी बनी, जहां दुनिया के सबसे बड़े 5211 किलोग्राम वजनी पारद शिवलिंग की भव्य प्राण प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच संपन्न हुई। श्री साई शिव गंगा धाम में आयोजित इस तीन दिवसीय समारोह में देशभर से आए दो हजार से अधिक श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं, साधकों और विशिष्ट अतिथियों ने भाग लेकर इसे एक यादगार आध्यात्मिक उत्सव का रूप दिया।
इस विशाल पारद शिवलिंग का निर्माण ध्यान गुरु रघुनाथ गुरुजी ने लगभग एक दशक की साधना, अनुसंधान और पारद विज्ञान के गहन अध्ययन के बाद कराया है। बताया गया कि शिवलिंग के निर्माण में पारा, चांदी, स्वर्ण तथा 108 प्रकार की औषधीय जड़ी-बूटियों के विशेष अर्क का उपयोग किया गया है। आध्यात्मिक जगत से जुड़े जानकार इसे विश्व का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग मानते हैं, जो भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करता है।
तीन दिनों तक चले इस महोत्सव में यज्ञ, ध्यान साधना, आध्यात्मिक प्रवचन, भजन और विभिन्न वैदिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। पूरे परिसर में भक्ति, साधना और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने इसे केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि आत्मिक जागरण और सामाजिक सद्भाव का संदेश देने वाला आयोजन बताया।
समारोह गुरु गोरक्षनाथ परंपरा, गिरनार के पूज्य पीर योगी महंत सोमनाथ बापू के आशीर्वाद तथा पद्मभूषण डॉ. विजय भटकर के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। आयोजन का मुख्य उद्देश्य विश्व शांति, मानव कल्याण और सकारात्मक चेतना का संदेश जन-जन तक पहुंचाना था।
ध्यान गुरु रघुनाथ गुरुजी ने कहा कि यह शिवलिंग केवल श्रद्धा का प्रतीक नहीं है, बल्कि ध्यान, आत्मचिंतन और आंतरिक जागृति का केंद्र भी है। उनके अनुसार वर्षों की साधना और शोध से निर्मित यह शिवलिंग मानवता को शांति, संतुलन और आध्यात्मिक विकास की दिशा में प्रेरित करेगा। उन्होंने बताया कि इससे पहले वर्ष 2019 में भी उन्होंने लगभग 10 हजार लोगों की सहभागिता के साथ एक विशाल अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया था।
कार्यक्रम में अनेक प्रतिष्ठित संतों और धार्मिक नेताओं की उपस्थिति रही। इनमें जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी जी महाराज, स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज, स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज, स्वामी रविन्द्र पुरी महाराज, श्री सुधांशु जी महाराज, साध्वी ऋतंभरा, आचार्य मनीष (HIIMS), सांसद राघव चड्ढा तथा राज्य मंत्री एवं गंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम सहित कई गणमान्य अतिथि शामिल रहे।
इस आयोजन की सफलता में उद्योगपति और समाजसेवी राजीव बंसल की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने व्यवस्थाओं और समन्वय में सक्रिय योगदान दिया। राजीव बंसल ने कहा कि यह आयोजन उनके लिए सेवा और श्रद्धा का अवसर रहा तथा उन्हें साईं बाबा के आशीर्वाद से इस दिव्य कार्य में योगदान देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
समारोह के दौरान अध्यात्म के साथ सामाजिक सरोकारों पर भी विशेष जोर दिया गया। रघुनाथ गुरुजी द्वारा संचालित विभिन्न अभियानों में दिव्यांग सशक्तिकरण, महिला किसान विकास, पर्यावरण संरक्षण और नवाचार आधारित सामाजिक कार्यक्रम शामिल हैं। दिव्यांग इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (DICCAI) के माध्यम से दिव्यांगजनों को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
समापन अवसर पर रघुनाथ गुरुजी ने सभी संतों, श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अध्यात्म, विज्ञान, सेवा और मानव कल्याण के समन्वय का प्रतीक है। समारोह के अंत में “ध्यान से शांति, शांति से सद्भाव और सद्भाव से विश्व कल्याण” का संदेश दिया गया, जिसे उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आत्मसात किया।









