Guru Nanak Jayanti 2022: आज सिख धर्म के पहले गुरु नानक देव जी की जयंती है। उनके इस जयंती को प्रकाशपर्व के रूप में मनाया जाता है। देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में जहां-जहां सिख धर्म के लोग हैं और नानक जी के अनुयायी हैं, वे लोग आज इनकी जयंती को प्रकाशपर्व के रूप में मना रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी प्रकाशपर्व के इस उत्सव में शामिल हुए। गुरु नानक जी के प्रकाशपर्व पर उनके अच्छे विचारों और कार्यों को लोग याद कर रहे हैं। आज इस प्रकाशपर्व पर हम भी आपके लिए एक ऐसी कहानी लेकर आएं हैं, जो गुरु नानक जी के जीवन को समाज के लिए समर्पित दिखाती है।

Guru Nanak Jayanti 2022:गुरु नानक अपने शिष्यों के साथ करते थे भ्रमण
गुरु नानक जी का जन्म 1469 में पंजाब के तलवंडी(पाकिस्तान)में हुआ था। मात्र 16 वर्ष की आयु में नानक देव जी का विवाह लाखौकी नामक स्थान में रहने वाली सुलखनी से हुआ था। इनके दो पुत्र श्रीचंद और लख्मीचंद थे। बताया जाता है कि पुत्रों के जन्म के बाद गुरु नानक देव अपने साथियों के साथ तीर्थ में निकल गए। भारत, अफगानिस्तान, फारस, अरब सहित कई देशों में भ्रमण करते हुए उपदेश देते थे। इन्हीं यात्राओं को पंजाबी में ‘उदासियां’ कहा जाता है। अपनी इस यात्रा के दौरान गुरु नानक जी एक गांव में पहुंचे।
नास्तिक विचारधारा वाले थे गांव के लोग
जब गुरु नानक देव जी अपने शिष्यों के साथ नास्तिक विचारधारा वाले गांव में पहुंचे, तो वहां के लोगों ने उनको अपमानित किया। गांव के लोगों ने नानक देव जी और उनके शिष्यों का आदर सत्कार करने की बजाय उन्हें कटु और कड़वे वचन बोले। इतना ही नहीं जब गुरु नानक जी उस गांव से जाने लगे तो वहां के लोग उपहास उड़ाते हुए उनसे आशीर्वाद देने को कहा। इस पर गुरु नानक देव जी ने बड़े ही विनम्रता से कहा “आबाद रहो”
नेक और दयालु थे गांव के लोग
गुरु नानक जी की यह यात्रा ऐसे ही जारी रही। एक दिन वे भ्रमण करते हुए एक ऐसे गांव में पहुंचे जहां के लोग नेक और दयालु थे। इसके साथ ही वेलोग ईश्वर में आस्था रखने वाले थे। बताया गया कि इस गांव का नाम समीप्रस्थ ग्राम था। लोगों ने अपने गांव में गुरु नानक देव जी के साथ-साथ उनके शिष्यों का बहुत ही आदर-सत्कार किया। जब गुरु नानक देव अपने शिष्यों के साथ उस गांव से आगे जाने लगे तो गांव के लोगों ने उनसे आशीर्वाद देने के लिए आग्रह किया। इसपर गुरु नानक देव जी ने कहा “उजड़ जाओ”

शिष्य के सवाल का गुरु नानक जी ने दिया जवाब
गावं वालों को उजड़ जाओ का आशीर्वाद देकर गुरु नानक जी अपने शिष्यों के साथ आगे बढ़ गए। यात्रा में शामिल उनका एक शिष्य इस बात से बहुत ही परेशान था कि उसके गुरु जी ने अच्छे गांव वाले को उजड़ने और बुरे गांव वाले को आबाद रहने का आशीर्वाद क्यों दिया। इस सवाल को लेकर वह परेशान था। जब उससे और नहीं रहा गया तो उसने गुरु नानक देव जी से यह सवाल पूछ ही लिया। शिष्य ने गुरु नानक जी से बोला हे देव! आपने अपमान करने वाले उदंड लोगों को आबाद रहने का आशीर्वाद दिया और नेक लोगों को उजड़ जाने का कठोर आशीर्वाद क्यों दिया?
शिष्य के इस सवाल पर गुरु नानक देव जी मुस्कुराते हुए बोले-सज्जन लोग उजड़ने पर जहां भी जायेंगे वहां अपनी सज्जनता से उत्तम वातावरण का निर्माण करेंगे। लेकिन दुष्ट और दुर्जन व्यक्ति जहां विचरण करेगा वहां,अपने आचार-विचार से वातावरण दूषित करेगा। इस प्रयोजन से मैंने उन्हें वहीं आबाद रहने का आशीर्वाद दिया।
गुरु के इस जवाब से उनका शिष्य संतुष्ट दिखा और नानक जी के साथ आगे की यात्रा पर निकल गया।
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