Diwali Festival : आज (12 नवंबर) देशभर में दिवाली का त्योहार मनाया जा रहा है। मिठाइयों और पकवानों से थालों को सजाने की तैयारी की जा रही है और साथ ही घरों को दीपों और चमचमाती लाइटों से सजाया जा रहा है। दिवाली को रोशनी का त्योहार माना जाता है। दिवाली लोगों के पसंदीदा त्योहारों में से एक है। जहां इसे पूरे भारत में हर्षोउल्लास से मनाया जाता है, वहीं विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के लोग भी इस त्योहार को बड़े ही धूम-धाम से मनाते हैं। दीपावली पर सभी लोग मिलकर पूरे घर को दीपों,अलग-अलग प्रकार की लाइट की लड़ियों, और इलेक्ट्रॉनिक सामान से सजाते हैं। लेकिन, बहुत से लोगों को यह पता नहीं होता, या याद नहीं रहता कि दिवाली को रोशनी का पर्व क्यों कहा जाता है। इस लेख में आपको हम इस विषय पर पूरी जानकारी देंगे।
Diwali Festival : इसलिए दिवाली को कहा जाता है रोशनी का पर्व
दिवाली को रोशनी के त्योहार के तौर पर सतयुग से मनाया जा रहा है। रामायण काल के दौरान, भगवान श्री राम ने अपनी छोटी माता कैकेयी के आदेश का सम्मान करते हुए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया था। जिसके बाद राम, उनकी पत्नी सीता और उनके छोटे भी लक्ष्मण अयोध्या छोड़कर वन में एक छोटी कुटिया में रहने चले गए थे। इस वनवास के दौरान सीता का हरण लंकापति रावण ने किया था।

जिसके बाद राम ने अपनी पत्नी को छुड़ाकर वापस लाने के लिए वानरों, रीचों और लंगूरों की सेना के साथ लंका पर आक्रमण कर दिया था। इस युद्ध में रावण भगवान श्री राम के हाथों मृत्यु को प्राप्त हो गया था। रावण के वध के बाद श्रीराम,लक्ष्मण, और सीता पुष्पक विमान से अयोध्या के लिए निकले थे। अयोध्या पहुंचने पर राम, सीता और लक्ष्मण का भव्य स्वागत किया गया था, जिसमें पूरी अयोध्या को दीपों से रोशन किया गया था।
बता दें, हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार जिस दिन रावण का वध हुआ था, उस दिन दशहरे का त्योहार मनाया जाता है। दशहरे के 20 दिन बाद जब श्री राम अयोध्या पहुंचे थे, उस दिन उनके आगमन की खुशी में दीपोत्सव यानी दीपावली मनायी जाती है।
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