West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार (8 जनवरी, 2026) को उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर सीधा हमला बोला। मामला भारतीय राजनीतिक कार्रवाई समिति (I-PAC) के प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर हुई छापेमारी से जुड़ा है।
छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री स्वयं कोलकाता में प्रतीक जैन के घर पहुंचीं, जहां माहौल तनावपूर्ण हो गया। भाजपा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जांच एजेंसी की कार्रवाई में “हस्तक्षेप” किया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ममता बनर्जी ने तीखे शब्दों में कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक मुकाबले में असफल होने के बाद केंद्रीय एजेंसियों का सहारा ले रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि छापेमारी के जरिए पार्टी की रणनीति, दस्तावेज़ और मतदाताओं से जुड़ा डेटा निशाना बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों से भाजपा को कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलने वाला, बल्कि इसका उल्टा असर पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने केंद्र को सीधे संदेश देते हुए कहा कि लोकतंत्र में जीत-हार का फैसला जनता करती है, न कि जांच एजेंसियां। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी अपील की कि वह अपने गृह मंत्री पर नियंत्रण रखें, ताकि संस्थाओं की निष्पक्षता बनी रहे।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर राज्य और केंद्र के बीच टकराव को उजागर कर दिया है। आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले यह मुद्दा बंगाल की सियासत में और गरमाने के संकेत दे रहा है।









