Parliament Winter Session: विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा से ‘जी राम जी’ बिल पास, सदन की कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए स्थगित

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Parliament Winter Session: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में भारी हंगामे और विपक्ष के तीखे विरोध के बीच जी राम जी बिल पारित कर दिया गया। इस विधेयक पर सदन में करीब आठ घंटे तक लंबी बहस चली, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चर्चा का जवाब दिया। जवाब के दौरान विपक्षी सांसदों ने जोरदार नारेबाजी की और सदन का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।

शिवराज सिंह चौहान का जवाब, विपक्ष का हंगामा

लोकसभा में जी राम जी बिल पर चर्चा का उत्तर देते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार की मानसिकता संकीर्ण या सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण भारत के विकास को लेकर गंभीर है और योजनाओं को व्यापक सोच के साथ लागू किया जा रहा है। उनके जवाब के दौरान विपक्षी सांसदों ने कागज फेंकने शुरू कर दिए, जिस पर लोकसभा अध्यक्ष ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि “जनता ने आपको कागज फेंकने के लिए नहीं चुना है।”

NREGA और नामकरण पर तीखी बहस

चर्चा के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि NREGA से पहले भी देश में रोजगार गारंटी से जुड़ी योजनाएं चलाई गई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2009 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए NREGA में महात्मा गांधी का नाम जोड़ा गया था। इस बयान के बाद विपक्षी सदस्य सदन में “हमें MGNREGA चाहिए” के नारे लगाने लगे।

इसके अलावा, शिवराज सिंह चौहान ने प्रियंका गांधी के उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिनमें उन्होंने कहा था कि मौजूदा सरकार अपनी मर्जी से योजनाओं के नाम बदल रही है और नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर बनी योजनाओं की सूची तैयार कर रही है। इस पर शिवराज ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने देश के विभाजन को स्वीकार कर महात्मा गांधी के आदर्शों की अनदेखी की थी।

MGNREGA में खामियों का जिक्र

ग्रामीण विकास मंत्री ने अपने संबोधन में MGNREGA की कमियों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में इस योजना के तहत मजदूरी पर ज्यादा और संसाधनों व सामग्री की खरीद पर अपेक्षाकृत कम खर्च किया गया, जिससे योजना की मूल भावना प्रभावित हुई।

वेल में नारेबाजी और कागज फाड़ने की घटना

जी राम जी बिल के खिलाफ विपक्षी सांसदों ने सदन के वेल में पहुंचकर जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान कागज फाड़े गए और उनके टुकड़े सदन में फेंके गए, जिससे कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी हुई।

काफी हंगामे के बावजूद सरकार ने संख्या बल के आधार पर जी राम जी बिल को लोकसभा से पारित करा लिया।