Hormuz Crisis: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर नया भू-राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले चुनिंदा जहाजों पर 20 लाख डॉलर का ट्रांजिट शुल्क लागू कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर नए दबाव की आशंका बढ़ गई है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और वाशिंगटन ने तेहरान पर जलमार्ग पूरी तरह खोलने के लिए दबाव बढ़ा दिया है।
ईरान का बड़ा कदम, नियंत्रण का संकेत
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन (Masoud Pezeshkian) ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के विरोधियों को छोड़कर अन्य सभी देशों के लिए खुला रहेगा। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्यों के मुताबिक, यह शुल्क पहले ही लागू किया जा चुका है और इसे इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर “नए संप्रभु नियंत्रण” की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ईरान की ओर से जलडमरूमध्य पर अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करने का संकेत है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस निर्यात इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
ट्रंप की चेतावनी और अमेरिकी दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि यदि 48 घंटे के भीतर जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा और बिजली ढांचे पर हमला कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका किसी भी हाल में ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा।
ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिकी सेना ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जैसे कदमों पर भी विचार कर रही है, जिससे हालात और गंभीर हो सकते हैं।
पाकिस्तान में वार्ता बेनतीजा
तनाव कम करने के प्रयासों के तहत अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में लगभग 21 घंटे तक बातचीत चली, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। वार्ता के बाद ईरान ने अमेरिका की मांगों को “असंवेदनशील” बताया और कहा कि मौजूदा शर्तों के तहत प्रगति संभव नहीं है।
इस बीच पाकिस्तान ने दोनों देशों से युद्धविराम बनाए रखने की अपील करते हुए मध्यस्थता की पेशकश की है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है। दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में ट्रांजिट शुल्क और संभावित नाकेबंदी से तेल कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह कदम केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश भी है। इससे अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। यदि तनाव जल्द नहीं घटा, तो इसका असर ऊर्जा बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार तक व्यापक रूप से महसूस किया जा सकता है।









