सांपों की रहस्यमयी दुनिया: सांप केंचुली क्यों उतारते हैं और कैसे महीनों बिना खाए रह जाते हैं?

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भारत को अक्सर “सर्पों की धरती” कहा जाता है। यहां करीब तीन सौ से अधिक प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं, जिनमें से कुछ ही अत्यधिक विषैले माने जाते हैं – जैसे इंडियन कोबरा, करैत, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर। लेकिन सांपों की दुनिया केवल ज़हर या काटने की कहानियों तक सीमित नहीं है। उनकी जैविक और व्यवहारिक विशेषताएं बेहद दिलचस्प हैं। आइए समझें कि आखिर क्यों सांप अपनी त्वचा (केंचुली) उतारते हैं, वे बिना खाए महीनों तक जिंदा कैसे रहते हैं और शिकार करने के उनके अनोखे तरीके क्या हैं।

सांप त्वचा क्यों बदलते हैं?

सांपों की त्वचा बदलने की प्रक्रिया को शेडिंग या एक्डाइसिस कहा जाता है। दरअसल, सांपों का शरीर लगातार बढ़ता रहता है, जबकि उनकी बाहरी त्वचा (स्केल्स) एक निश्चित सीमा तक ही खिंच सकती है। जैसे-जैसे सांप का शरीर बड़ा होता है, पुरानी त्वचा तंग और अनुपयोगी हो जाती है। यही कारण है कि समय-समय पर सांप उस पुरानी परत को उतार देते हैं और एक नई चमकदार त्वचा बाहर आ जाती है। यह केवल बढ़ने की प्रक्रिया ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य का भी हिस्सा है। पुरानी त्वचा के साथ-साथ परजीवी और संक्रमण के खतरे भी खत्म हो जाते हैं। यही वजह है कि खेतों या जंगलों के किनारे अक्सर पूरी लंबाई की उतरी हुई सांप की खाल दिखाई देती है।

बिना खाए महीनों तक जिंदा कैसे रहते हैं सांप?

अब सवाल उठता है कि सांप इतने लंबे समय तक बिना भोजन के कैसे जीवित रहते हैं? इसका उत्तर उनके बेहद धीमे मेटाबॉलिज़्म में छिपा है। सांप एक बार शिकार करते हैं तो पूरा शिकार निगल जाते हैं, चाहे वह चूहा हो, पक्षी हो या फिर कोई बड़ा जीव जैसे खरगोश। उनके पाचन तंत्र को इस भोजन को पूरी तरह पचाने में कई दिन से लेकर कई हफ्ते तक का समय लगता है। इस दौरान उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत नहीं होती। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि कई प्रजातियां, खासकर अजगर, छह महीने से लेकर एक साल तक बिना भोजन के जीवित रह सकती हैं। भारतीय रॉक पायथन इसका उदाहरण है, जो किसी बड़े शिकार के बाद लंबे समय तक दोबारा शिकार नहीं करता। ऊर्जा बचाने की उनकी क्षमता इतनी अद्भुत होती है कि वे अपने शरीर की गतिविधियों और मेटाबॉलिक दर को 70 से 80 प्रतिशत तक घटा लेते हैं।

सांपों के शिकार करने के अनोखे तरीके

जहां तक शिकार करने के तरीकों की बात है, भारतीय सांप बेहद विविध हैं। कोबरा और करैत जैसे सांप अपने ज़हर का इस्तेमाल करते हैं। उनका विष शिकार की तंत्रिका प्रणाली को तुरंत प्रभावित करता है और शिकार हिलने-डुलने की स्थिति में नहीं रह पाता। इसके विपरीत अजगर और रत्न सांप जैसी प्रजातियां शिकार को अपने शरीर में लपेटकर उसका दम घोंट देती हैं और फिर निगल जाती हैं। वहीं वाइपर जैसी प्रजातियां घात लगाकर शिकार करती हैं। वे अक्सर झाड़ियों, मिट्टी या पत्तों के बीच छिपे रहते हैं और जैसे ही शिकार नजदीक आता है, अचानक झपट पड़ते हैं। भारत की नदियों और झीलों में मिलने वाले चेकर्ड कीलबैक जैसे जल-सांप मछलियों और मेंढकों का शिकार पानी के भीतर करते हैं। उनकी तेज़ी और समय का सटीक अनुमान उन्हें माहिर शिकारी बनाता है।

सांपों की इस अद्भुत जीवनशैली का महत्व केवल उनके अस्तित्व तक सीमित नहीं है। वे हमारे पारिस्थितिकी तंत्र में अहम भूमिका निभाते हैं। ग्रामीण भारत में खेतों के आस-पास सांपों की मौजूदगी चूहों की संख्या को नियंत्रित करती है, जिससे किसानों की फसलें सुरक्षित रहती हैं। यानी वे प्राकृतिक कीट नियंत्रण का काम करते हैं। दुर्भाग्यवश, डर और अंधविश्वास की वजह से लोग उन्हें मार देते हैं, जबकि असलियत यह है कि सांप इंसानों से दूर रहना ही पसंद करते हैं और तभी काटते हैं जब उन्हें खतरा महसूस होता है।

सांपों को लेकर मिथक

भारत में सांपों से जुड़े कई मिथक प्रचलित हैं। अक्सर कहा जाता है कि सांप बदला लेते हैं या उनके पास मणि होती है, लेकिन ये सब लोककथाएं हैं। हकीकत यह है कि सांप बुद्धिमान जरूर हैं, लेकिन वे इंसानों को पहचानकर बदला लेने में सक्षम नहीं होते। वे बस अपनी रक्षा के लिए आक्रामक हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि हम उनके साथ सह-अस्तित्व सीखें और उन्हें अनावश्यक रूप से नुकसान न पहुंचाएं।

अंततः यह कहा जा सकता है कि सांप जितने रहस्यमय दिखते हैं, उतने ही जरूरी भी हैं। उनकी त्वचा बदलना उनके विकास और स्वास्थ्य का हिस्सा है, उनकी ऊर्जा बचाने की क्षमता उन्हें कठिन हालात में जीवित रखती है और उनके शिकार करने के तरीके हमें प्रकृति के विविध रूप दिखाते हैं। भारतीय परिदृश्य में सांप न केवल जंगलों और खेतों के प्रहरी हैं बल्कि हमारी जैव विविधता की रक्षा करने वाले महत्वपूर्ण जीव भी हैं।

DISCLAIMER : यह लेख सांपों की जैविक विशेषताओं और पारिस्थितिकी पर आधारित एक जानकारीपरक एक्सप्लेनेशन है। इसमें दी गई जानकारियां विभिन्न शोध और वाइल्डलाइफ़ रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। पाठकों से अनुरोध है कि सांप को कभी खुद पकड़ने या छेड़ने की कोशिश न करें। भारत में कई सांप विषैले होते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकते हैं। किसी भी परिस्थिति में सांप दिखने पर विशेषज्ञ या वन विभाग की मदद लें। APN NEWS इसकी पूर्ण सटीकता, संपूर्णता और अद्यतन होने का दावा नहीं करता। यह सामग्री केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रस्तुत की गई है।