10 मिनट डिलीवरी पर विराम? सरकार की सख्ती के बाद Blinkit, Swiggy और Zepto ने बदली रणनीति, जानिए पूरी कहानी

0
0
10 मिनट डिलीवरी पर विराम? सरकार की सख्ती के बाद Blinkit, Swiggy और Zepto ने बदली रणनीति, जानिए पूरी कहानी
10 मिनट डिलीवरी पर विराम? सरकार की सख्ती के बाद Blinkit, Swiggy और Zepto ने बदली रणनीति, जानिए पूरी कहानी

अगर आप क्विक कॉमर्स ऐप्स से 10 मिनट में सामान मंगाने के आदी हैं, तो यह बदलाव आपके लिए अहम है। डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को लेकर सरकार की सख्त चेतावनी के बाद अब क्विक कॉमर्स कंपनियां अपनी रणनीति बदलती नजर आ रही हैं। Blinkit के बाद Zepto, Swiggy Instamart और Flipkart Minutes ने भी अपने ब्रांडिंग से “10 मिनट डिलीवरी” के दावे को हटा दिया है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या भारत में 10 मिनट में डिलीवरी का दौर अब खत्म होने की कगार पर है।

भारत सरकार की सख्ती के बाद देश की बड़ी क्विक कॉमर्स कंपनियों ने अपने टैगलाइन में बड़ा बदलाव किया है। जहां पहले 10 मिनट में डिलीवरी को सबसे बड़ी खासियत के तौर पर पेश किया जाता था, अब कंपनियां इससे दूरी बनाती दिख रही हैं। Zepto अब खुद को “Groceries in minutes” कह रहा है, जबकि Swiggy Instamart ने “Groceries and More” को अपनी नई पहचान बना लिया है। वहीं Blinkit ने भी अपने ऐप पर 10 मिनट की बात हटाकर अब प्रोडक्ट्स की संख्या और सुविधा पर जोर देना शुरू कर दिया है।

सरकार की सख्ती से बदला फैसला

पिछले सप्ताह हुई एक अहम बैठक में केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने क्विक कॉमर्स कंपनियों को डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संदेश दिया। खास तौर पर 10 मिनट में डिलीवरी जैसे वादों को लेकर चिंता जताई गई, क्योंकि इससे राइडर्स पर समय का अत्यधिक दबाव पड़ता है और सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है। इसी चेतावनी के बाद कंपनियों ने अपने ब्रांड मैसेज में बदलाव करना शुरू किया।

कंपनियों के बदले टैगलाइन

Blinkit पहले दावा करता था कि 10 हजार से ज्यादा प्रोडक्ट 10 मिनट में डिलीवर किए जाते हैं, लेकिन अब ऐप पर लिखा है कि 30 हजार से ज्यादा प्रोडक्ट आपके दरवाजे तक पहुंचाए जाते हैं।
Zepto ने “10 मिनट” की जगह “Groceries in minutes” को अपनाया है।
Swiggy Instamart ने भी 10 मिनट का जिक्र हटाकर “Groceries and More” टैगलाइन को चुना है।
हालांकि, Tata Group की BigBasket अब भी खुद को “10 min grocery app” के तौर पर पेश कर रही है।

10 मिनट डिलीवरी पर क्यों उठे सवाल

न्यू ईयर ईवनिंग के मौके पर देशभर में गिग वर्कर्स ने हड़ताल की थी। इस दौरान डिलीवरी पार्टनर्स ने तेज डिलीवरी के दबाव, सड़क पर बढ़ते खतरे और कम कमाई को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि 10 मिनट में ऑर्डर पहुंचाने के चक्कर में उन्हें तेज रफ्तार से वाहन चलाना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।

कमाई को लेकर भी नाराजगी

गिग वर्कर्स एसोसिएशन के अनुसार, कई बार एक साथ दो ऑर्डर डिलीवर करने पर भी पार्टनर को एक ही ऑर्डर के बराबर भुगतान मिलता है। एक उदाहरण में दो ऑर्डर पहुंचाने पर सिर्फ 19 रुपये 30 पैसे दिए गए। इससे काम और जोखिम दोनों बढ़ते हैं, लेकिन आमदनी में इजाफा नहीं होता।

वर्कर्स ने फैसले का किया स्वागत

गिग वर्कर्स एसोसिएशन ने कंपनियों के इस कदम को सकारात्मक बताया है। उनका कहना है कि इससे यह स्वीकार किया गया है कि 10 मिनट की डिलीवरी डिलीवरी पार्टनर्स के लिए खतरनाक हो सकती है। साथ ही उन्होंने सरकार, कंपनियों और वर्कर्स के बीच नियमित संवाद के लिए एक स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग की है।

क्विक कॉमर्स बाजार की तस्वीर

गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के टॉप 150 शहरों में क्विक कॉमर्स का बाजार करीब 235 अरब डॉलर का है। यह सेक्टर 2025 से 2030 के बीच 35 से 40 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ सकता है और 2030 तक 47 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है।

Blinkit बना बाजार का लीडर

रिपोर्ट के अनुसार, Blinkit के पास भारत के क्विक कॉमर्स बाजार का लगभग 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा है। जून 2025 में उसने मंथली एक्टिव यूजर्स के मामले में Zepto को पीछे छोड़ दिया था और दिसंबर तक उसके 2 करोड़ 40 लाख एक्टिव यूजर्स हो चुके थे।

गिग वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी की तैयारी

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 1 करोड़ 27 लाख गिग वर्कर्स हैं, जिनकी संख्या 2029-30 तक बढ़कर 2 करोड़ 35 लाख तक हो सकती है। नीति आयोग के अनुसार, नए लेबर कोड के जरिए सरकार गिग वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी देने की दिशा में काम कर रही है।

कुल मिलाकर, अब क्विक कॉमर्स कंपनियों का फोकस सिर्फ तेजी नहीं, बल्कि सुरक्षित डिलीवरी पर भी शिफ्ट होता दिख रहा है। 10 मिनट का वादा भले ही पीछे छूटता नजर आ रहा हो, लेकिन इससे डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा और कामकाजी हालात बेहतर होने की उम्मीद जरूर बढ़ी है।