Justice Yashwant Varma Resigns: इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा (Yashwant Varma) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को सौंपते हुए तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने की घोषणा की। इस कदम को उनके खिलाफ चल रही जांच और बढ़ते विवादों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
जस्टिस वर्मा ने अपने इस्तीफे में कहा कि न्यायिक पद पर सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात रही, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में वह पद पर बने रहना उचित नहीं समझते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने इस्तीफे के कारणों का बोझ राष्ट्रपति के पद पर नहीं डालना चाहते। इस पत्र की प्रति उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी भेजी है।
कैश विवाद से जुड़ा मामला
यह पूरा विवाद उस घटना से जुड़ा है, जब मार्च 2025 में उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर आग लगने के बाद कथित रूप से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की बात सामने आई थी। यह घटना होली के दिन देर रात हुई थी, जब जस्टिस वर्मा घर पर मौजूद नहीं थे। इस मामले के सामने आने के बाद न्यायिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई थी।
जांच और महाभियोग की प्रक्रिया
इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए Lok Sabha के स्पीकर Om Birla ने जजेस (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के वरिष्ठ न्यायाधीशों के साथ एक अनुभवी अधिवक्ता को शामिल किया गया।
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा के 146 सांसदों द्वारा महाभियोग प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई थी। ऐसे में जस्टिस वर्मा के खिलाफ पद से हटाने की कार्यवाही की संभावना भी बन रही थी।
ट्रांसफर और विवाद का सिलसिला
जस्टिस वर्मा का करियर पिछले कुछ समय से विवादों के कारण चर्चा में रहा है। वर्ष 2014 में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया था, जिसके बाद 2021 में उनका तबादला दिल्ली हाईकोर्ट कर दिया गया। हालांकि, कैश विवाद सामने आने के बाद उन्हें फिर से इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा गया, जहां उन्होंने अप्रैल 2025 में शपथ ली थी।
इसके बावजूद, विवाद उनके कार्यकाल पर लगातार छाया रहा और अंततः उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया।









