कनेक्टिंग थ्रू कल्चर

नई दिल्ली, हमारे देश की एक खास बात यह है कि  इसकी संस्कृति की जड़ें काफी गहरी हैं. इस विषय पर डॉ विनय सहस्त्रबुद्धे और डॉ सच्चिदानंद जोशी के संपादन में अपनी तरह की पहली पुस्तक कनेक्टिंग  थ्रू कल्चर – एन्थोलॉजी ऑफ इंडिया सॉफ्ट पावर का विमोचन,  विदेश मंत्री एस जयशंकर और केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के हाथों बुधवार को दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में संपन्न हुआ.  

पुस्तक के विमोचन के अवसर पर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि सॉफ्ट पावर हाल के दिनों में  सामने आया एक नया शब्द है लेकिन यह अवधारणा भारत के लिए कोई नई नहीं है. यह भारतीय सांस्कृतिक लोकाचार में गहराई से समाई  है. उन्होंने कहा कि भारत की  यह शक्ति संस्कृत भाषा और उसकी संस्कृति पर  निर्भर है. विश्व में गुरु का कोई पद या दर्जा नहीं है यह एक भूमिका है और भारत में तमाम संस्कृतियों के बीच में यह भूमिका बखूबी निभाई है अब हम पूरा देश चाहता है कि भारत एक बार फिर से विश्व गुरु बने .  इसे हम सबने महसूस किया है और अब हम चाहते हैं कि हम फिर से उस तरह की स्थिति को पुनर्जीवित करने में सक्षम हों.  भारत के महान ऋषियों ने भारत की एकता  के लिए आत्मा को  सबसे बड़ा आधार माना… ताकि भारत की आत्मा जीवित रहे एक रहे.

विमोचन के मौके पर केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि सॉफ्ट पावर के साथ देश क्या करते हैं यह देश की ताकत पर निर्भर करता है. यह एक सहज प्रक्रिया है जो कभी धीरे और निरंतर हो सकती है या कभी आक्रमक. लेकिन सॉफ्ट पावर हमेशा छवि का निर्माण और मानक स्थापित करने का काम करती है. श्री जयशंकर ने कहा कि उपनिवेशवादी व्याख्याओं को सुधारने और विश्व पटल पर बिना आक्रामक हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित संवर्धित करने में भारत की सॉफ्ट पॉवर बहुत कारगर है. विदेश मंत्री ने कहा कि सॉफ्ट पॉवर के जरिये भारत संवाद में पाश्चात्य दृष्टिकोण के प्रभुत्व का सामना करने तथा परिस्थितियों को पुनर्परिभाषित करने में सक्षम है. उन्होंने कहा कि ‘कनेक्टिंग थ्रू कल्चर’ पुस्तक भारत की विरासत की एक बेहतर समझ और सांस्कृतिक कूटनीति के बाबत एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है. मेरी नजर में सॉफ्ट पॉवर वैश्विक शक्ति संतुलन और प्रभुत्व के सन्दर्भ में महत्वपूर्ण है।

‘कनेक्टिंग  थ्रू कल्चर – एन्थलॉजी ऑफ इंडिया सॉफ्ट पावर में भारत के महाकाव्यों, आयुर्वेद से लेकर भारतीय शास्त्रीय नृत्यों और भारतीय व्यंजनों इत्यादि से जुड़े संस्कृति के व्यापक पहलुओं को रेेखंकित किया गया है। इसमें भारतीय जनतंत्र और प्रवासी भारतीयों को भारतीय सॉफ्ट पॉवर के महत्वपूर्ण घटक के रूप में देखा गया है।  पुस्तक में भारतीय महाकाव्यों से लेकर आयुर्वेद तक और भारतीय नृत्य से लेकर भारतीय व्यंजनों तक कुल 23 लेख शामिल हैं. संकलन भारत के नायकों को समर्पित है … इसमें गौतम बुद्ध, श्री गुरु नानक, स्वामी विवेकानंद, रविंद्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी शामिल हैं. 

पुस्तक में प्रसिद्ध लेखक अमीश त्रिपाठी, शोधकर्ता पुष्पेश पन्त, जया जेटली, क्रिष्टोफर बेनिन्गर , कपिल कपूर,गाँधीवादी विचारक राजीव वोरा ने अपने लेखों का योगदान दिया है.  इसके अतिरिक्त आरिफ मोहम्मद खान और दोनों सम्पादकों ने भी अपने लेखों द्वारा इस संग्रह को पठनीय बनाया है।

  • मनीष राज सिंह एपीएन न्यूज़  दिल्ली

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here