इगतपुरी फर्जी कॉल सेंटर केस में बड़ा मोड़: PC Act की धाराएं लागू नहीं, मामला मजिस्ट्रेट कोर्ट ट्रांसफर

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CBI द्वारा दर्ज अपराध क्रमांक RC0682025E0005 के मुख्य आरोपी संदीप सिंह अब तक गिरफ्त से बाहर।
CBI द्वारा दर्ज अपराध क्रमांक RC0682025E0005 के मुख्य आरोपी संदीप सिंह अब तक गिरफ्त से बाहर।

By: सर्वजीत सोनी

महाराष्ट्र के नासिक ग्रामीण जिले के इगतपुरी में संचालित कथित फर्जी कॉल सेंटर घोटाले में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सीबीआई (Central Bureau of Investigation) द्वारा दर्ज इस मामले को अब सत्र न्यायालय से हटाकर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट, इगतपुरी (जिला नाशिक) की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है।

सत्र न्यायालय का आदेश: PC Act लागू नहीं

पुणे की जिला एवं सत्र अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान आरोपों के आधार पर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट [Prevention of Corruption Act, 1988 (PC Act)] की धाराएं लागू नहीं होतीं। इसी आधार पर मामला मजिस्ट्रेट अदालत को ट्रांसफर किया गया।

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Court Document- CBI द्वारा दर्ज इस मामले को अब सत्र न्यायालय से हटाकर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट, इगतपुरी (जिला नाशिक) की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है।

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आगे की जांच में भ्रष्टाचार से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं और पूरक आरोपपत्र दायर किया जाता है, तो केस दोबारा सत्र न्यायालय को भेजा जा सकता है।

यह मामला CBI, EOB, मुंबई द्वारा अपराध क्रमांक RC0682025E0005 (दिनांक 08/08/2025) के तहत दर्ज किया गया था।

विदेशी नागरिकों से ठगी का आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, इगतपुरी क्षेत्र के एक रिज़ॉर्ट परिसर से संचालित कॉल सेंटर के माध्यम से विदेशी नागरिकों को तकनीकी सहायता और सॉफ्टवेयर सपोर्ट के नाम पर ठगा जा रहा था।

CBI का दावा है कि यह नेटवर्क संगठित तरीके से चल रहा था और इसके तार अन्य राज्यों तक जुड़े हो सकते हैं। एजेंसी वित्तीय लेन-देन और डिजिटल ट्रेल की भी जांच कर रही है।

6 महीने बाद भी मुख्य आरोपी फरार

मामले का मुख्य आरोपी संदीप सिंह प्राथमिकी दर्ज होने के लगभग छह महीने बाद भी फरार है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद उसकी गिरफ्तारी न हो पाना जांच एजेंसी के लिए चुनौती बना हुआ है।

सूत्रों के मुताबिक, CBI ने कई स्थानों पर दबिश दी है और तकनीकी सर्विलांस के जरिए आरोपी का पता लगाने का प्रयास जारी है। हालांकि लुकआउट नोटिस या रेड कॉर्नर नोटिस को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

क्या वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचेगी जांच?

मामले में तब नया मोड़ आया जब जांच के दायरे में कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के आने की चर्चा सामने आई। जानकारी के अनुसार, नासिक ग्रामीण के एक वरिष्ठ अधिकारी से लंबी पूछताछ की गई है।

CBI इस पहलू की जांच कर रही है कि क्या कथित कॉल सेंटर को किसी स्तर पर संरक्षण मिला था। हालांकि अभी तक किसी भी अधिकारी के खिलाफ औपचारिक आरोप तय नहीं किए गए हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि पूछताछ को दोष सिद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

फिलहाल मामला मजिस्ट्रेट कोर्ट में विचाराधीन है। जमानत याचिकाओं और आगे की न्यायिक कार्यवाही वहीं होगी।

अब सबकी निगाहें मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी पर टिकी हैं। संदीप सिंह की गिरफ्तारी के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि क्या इस मामले में किसी सरकारी अधिकारी की भूमिका थी या आरोप महज़ अटकलें हैं। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। आरोप सिद्ध होना शेष है।