Crime In India | 2021 में भारत में दर्ज किए गए 60 लाख से अधिक केस, जानिए अपराध के बारे में क्या बताती है NCRB की रिपोर्ट

वर्ष 1953 में पहली बार प्रकाशित हुई इस रिपोर्ट का ये 69वां संस्करण है. ‘भारत में अपराध’ रिपोर्ट (Crime In India) रिपोर्ट देश भर में कानून और व्यवस्था की स्थिति को समझने में एक महत्त्वपूर्ण उपकरण के रूप में कार्य करती है.

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Crimes In India | 2021 में भारत में दर्ज किए गए 60 लाख से अधिक केस, जानिए अपराधों के बार में क्या बताती है राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट - APN News

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा देश में 2021 में हुए अपराधों का ब्योरा पेश किया गया है. तीन हिस्सों में जारी की गई ‘भारत में अपराध’ रिपोर्ट (Crime In India) में 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में वर्ष 2021 में हुए अपराधों का विस्तृत ब्योरा दिया गया है.

वर्ष 1953 में पहली बार प्रकाशित हुई इस रिपोर्ट का ये 69वां संस्करण है. ‘भारत में अपराध’ रिपोर्ट (Crime In India) रिपोर्ट देशभर में कानून और व्यवस्था की स्थिति को समझने में एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में कार्य करती है.

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देश में दर्ज किए गए कुल मामले

‘भारत में अपराध’ रिपोर्ट (Crime In India) रिपोर्ट के अनुसार देशभर में 2021 में कुल 60,96,310 अपराध देशभर में दर्ज किए गये, जिनमें से 36 लाख 63 हजार 360 मामले भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत दर्ज किए गये. वहीं, 2020 में 66,01,285 मामले देशभर में दर्ज किए गये थे.

पंजीकृत अपराध दर प्रति लाख जनसंख्या 2020 के 487.8 के मुकाबले 2021 में घटकर 445.9 हो गई है. 2021 के दौरान, भारतीय दंड संहिता के तहत पंजीकृत मामलों में 13.9 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि विशेष और स्थानीय कानून (Special and Local Laws) के तहत हुए अपराधों में 2020 की तुलना में 3.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है.

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देशद्रोह

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में राजद्रोह के कुल 69 मामले दर्ज किए गए. वहीं वर्ष 2020 में राजद्रोह के कुल 66 मामले दर्ज किए गए थे.

महिलाओं के खिलाफ अपराध

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 4,28,278 मामले दर्ज किए गए, जो 2020 की तुलना में 15.3 फीसदी (3,71,503 मामले) की वृद्धि दर्शाता है.

आईपीसी के तहत दर्ज अपराधों में महिलाओं के खिलाफ अधिकांश मामले पति या उनके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता (31.8 फीसदी) के तहत दर्ज किए गए हैं. इसके बाद अपहरण और महिलाओं का अपहरण के (17.6 फीसदी) और बलात्कार (7.4 फीसदी) मामले दर्ज किये गये हैं.

2020 में 56.5 की तुलना में 2021 में प्रति लाख महिला आबादी पर दर्ज अपराध दर 64.5 है.

बच्चों के खिलाफ अपराध

जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार 2021 के दौरान बच्चों के खिलाफ अपराध के कुल 1,49,404 मामले दर्ज किए गए, जो 2020 (1,28,531 मामले) की तुलना में 16.2 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है.

2020 के दौरान बच्चों के खिलाफ अपराध के तहत प्रमुख अपराध अपहरण (45 फीसदी) और बाल यौन अपराध संरक्षण कानून, 2012 (POCSO) के तहत (38.1 फीसदी) थे.

2020 में 28.9 की तुलना में 2021 में प्रति लाख बच्चों की आबादी पर दर्ज अपराध दर 33.6 है.

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अत्याचार

अनुसूचित जाति (50,900) एवं अनुसूचित जनजाति (8,802) के खिलाफ अत्याचार के 2021 में 59,702 मामले दर्ज किए गये हैं.

वर्ष 2020 में अनुसूचित जाति (50,291) एवं अनुसूचित जनजाति (8,272) के खिलाफ अत्याचार के 58,563 मामले दर्ज किए गये थे.

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अवमानना

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, लोक सेवक (धारा 188 आईपीसी) द्वारा विधिवत प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा के तहत दर्ज मामलों में 2020 में 6,12,179 मामलों से 2021 में 3,22,115 मामलों और अन्य आईपीसी अपराधों के तहत 2020 में 10,62,399 मामले से 2021 में 4,96,535 मामले हो गए.

साइबर अपराध

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार 2021 में देश में 52,974 साइबर अपराध दर्ज किए गए हैं. पिछले वर्ष की तुलना में साइबर अपराध में 5.6 फीसदी की वृद्धि देखी गई है.

वर्ष 2020 में साइबर अपराध के 50,035 मामले दर्ज किए गये थे.

आत्महत्या

भारत में 2021 में कुल 1,64,033 लोगों मे आत्महत्या की है. ये संख्या वर्ष 2020 में 1,53,052 थी. रिपोर्ट के मुताबिक, आत्महत्या के मामलों में साल 2021 में 2020 की तुलना में 7.2 फीसदी की वृद्धि हुई है. वहीं, इस वर्ष आत्महत्या की दर में 6.2 फीसदी की वृद्धि हुई है.

2021 में आत्महत्या की अखिल भारतीय दर 12 फीसदी थी.

वर्ष 2021 में महाराष्ट्र में 22,207 सबसे अधिक आत्महत्या की घटनाएं सामने आई हैं. तमिलनाडु में 18,925, मध्य प्रदेश में 14,965, पश्चिम बंगाल में 13,500 और कर्नाटक में 13,056 आत्महत्या की घटनाएं सामने आई हैं.

इन पांच राज्यों में ही पचास फीसदी से ज्यादा आत्महत्या के मामले दर्ज किए गये हैं.

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पुलिस हिरासत में मौत (Custodial Deaths)

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में देशभर में पुलिस हिरासत में मौत के कुल 88 मामले दर्ज किए गए. वर्ष 2020 पुलिस हिरासत में मौत के 76 मामले देशभर में दर्ज किए गए थे.

रिपोर्ट के अनुसार गुजरात में पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों में एक वर्ष में 53 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वर्ष 2020 में गुजरात में पुलिस हिरासत में मौत के 15 मामले सामने आए थे, जो 2021 में बढ़कर 23 हो गए.

सड़क हादसे

देश में 2021 में यातायात संबंधी 4,22,659 लाख दुर्घटनाएं दर्ज की गई. इस दौरान जिनमें 1.73 लाख लोगों की जान चली गई. रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 2020 में यातायात संबंधी दुर्घटनाओं की संख्या 3,68,828 थी.

पर्यावरण से संबंधित अपराध

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार देश में वर्ष 2021 में पर्यावरण से संबंधित अपराधों के लिए 64,474 मामले दर्ज किए गये हैं. मामलों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 4.4 फीसदी की वृद्धि हुई है.

वर्ष 2020 में पर्यावरण से संबंधित अपराधों के लिए 61,767 मामले दर्ज किए गए थे.

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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) की स्थापना केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत भारतीय पुलिस में कानून व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिये पुलिस तंत्र को सूचना प्रौद्योगिकी समाधान और आपराधिक गुप्त सूचनाएं प्रदान करके समर्थ बनाने के उद्देश्य से वर्ष 1986 में की गई थी.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो को राष्ट्रीय पुलिस आयोग (1977-1981) और गृह मंत्रालय के कार्य बल (1985) की सिफारिशों के आधार पर स्थापित किया गया था.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो देशभर में अपराध के वार्षिक व्यापक आंकड़े (‘भारत में अपराध’ रिपोर्ट) एकत्रित करता है.

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