सुनो भई साधो –असम से यूपी तक मदरसों पर महासंग्राम, देश-हित की बात या वोट-बैंक की सियासत

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असम के मुख्यमंत्री हेमंत विस्व शर्मा ने असम के ऐसे मदरसों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है। हेमंत बिस्व शर्मा मदरसा शब्द को ही शब्दकोश से खत्म कर देने की बात कर रहे हैं, लेकिन मदरसा के नाम अपने देश भारत में मुसलमान के साथ नेता-गण वोट बैंक की राजनीति करते हैं। आजकल मदरसों का मामला कुछ ज्यादा ही गरम है। प्रधानमंत्री मोदी अल्पसंख्यक मुसलमानों की मदरसों की स्थिति सुधार में लाने की शुरु से वकालत करते रहे हैं। सरकार मदरसों में छात्रों के हाथों में कुरान के साथ कंप्यूटर थमाने की भी बात करती रही है। लेकिन इन सबों के बीच असम से उत्तरप्रदेश तक कई राज्यों में मदरसों के सर्वे के नाम पर बवाल मचा हुआ है। क्या है इस बवाल के पीछे की बात…क्या सचमुच मदरसों के नाम पर मुसलमानों के परेशान किया जा रहा है…जानेंगे पूरी बात …. जुड़े रहिए हमारे साथ……नमस्कार….मैं मनीष राज…मेरे साथ …आप सुन रहे हैं ……समससामयिक चर्चाओं का विशेष पॉडकास्ट सुनो भई साधो…. इस खास कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है।

साधो….यह तो आप सबको मालूम ही होगा कि पहले हिंदु सनातन संस्था में बच्चों के शिक्षा के लिए गुरुकुल होते थे, जिनका स्थान अब आधुनिक स्कूलों ने ले लिया है। मुस्लिम सामाजिक संरचना में शिक्षा देने का काम मदरसों के जरिए होता आया है। इन मदरसों से कई नामी मुस्लिम हस्तियों ने शिक्षा पाई है। लेकिन समय के दौर के साथ कदम मिलाकर न चलने की वजह से दुनिया भर के अधिकांश मदरसे बदहाली, कुव्यवस्था और अधूरी शिक्षा का जरिया बन गए। इसीलिए भारत में सरकारें इन मदरसों के आधुनिकीकरण की बाते करती हैं और योजनाएं लागू करती है।

भारत में देश विरोधी कई घटनाओं में मदरसों के लिंक मिलने के साक्ष्य मिलने के बाद से इन मदरसों पर सवाल उठने शुरु हो गए हैं। पूर्व भाजपा की महिला नेता नूपुर शर्मा की हत्या का प्लान बनाने वाला जैश ए मोहम्मद का आतंकी मोहम्मद नदीम को अगस्त महीने में सहारनपुर में गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में नदीम ने मदरसों औऱ मदरसों से जुड़े टेरर लिंक के बारे में खतरनाक खुलासे किए। असम में भी आतंक के 2 मॉड्यूल का पता चला है। ये दोनों मॉड्यूल AQIS यानी अलकायदा का इंडियन सब कॉन्टिनेंट चला रहा है। अभी तक जितने भी लोग पकड़े गए हैं, सबका इस अलकायदा के गुट से लिंक था। अब इसे आप इत्तेफाक कहिए या साजिश, सभी का कनेक्शन या तो किसी मदरसे से जुड़ा था, या फिर वो किसी मस्जिद के इमाम थे। और यही वजह है कि असम के मुख्यमंत्री हेमंत विस्व शर्मा ने असम के ऐसे मदरसों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है , जिनके आइएसआई या अलकायदा के लिंक सामने आ रहे है। हेमंत विस्व शर्मा खुलेआम कह रहे हैं कि मैं मदरसा नहीं अल कायदा के कार्यालयों को ध्वस्त कर रहा हूं। कई जगह तो असम की गांवों की मुस्लिम जनता ने ही आतंक के केंद्र रहे मदरसों को नेस्तनाबूद कर दिया । असम में हेमंत बिस्व शर्मा के इस कदम की मुस्लिम नेता कड़ी आलोचना कर रहे हैं।

Supreme Court
Supreme Court

असम का विवाद अभी जारी ही था कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य में सभी मदरसों का सर्वे कराने का फैसला किया। सरकार ने राज्य के सभी गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे 5 अक्टूबर तक कर के सर्वे रिपोर्ट शासन को 25 अक्टूबर तक भेजनी है। योगी सरकार के गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वेक्षण कराने के पीछे मकसद मदरसों की शिक्षा व्यवस्था बेहतर करना है। सर्वे में पता लगाया जाएगा कि मदरसों का वित्त पोषण कहां से हो रहा है। किस जिले में कितने गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे हैं. किस मदरसे में कितने बच्चे तालीम हासिल कर रहे हैं।

यह बात सही है कि गैर मान्यता प्राप्त कई मदरसे शिक्षा देने की जगह बच्चों के दिलो-दिमाग में कट्टरता की फसल सींच रहे हैं। सरकार सभी मदरसों को अपने संज्ञान में लाने की योजना बना रही है। ताकि किसी भी योजना का लाभ सही तरीके से समाज के सभी वर्गों को मिल सके। मदरसों में नई शिक्षा नीति के लागू किए जाने की बात सामने आ रही है। यदि ऐसा होता है तो मदरसो के जरिए राज्य को शिक्षकों की बड़ी मात्रा में जरुरत होगी। जिससे सबको फायदा होगा। मदरसों में शिक्षा पाने वाले बच्चों का स्तर भी सुधरेगा।

लेकिन इस मुद्दे पर राजनीति बदस्तूर जारी है। आईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इस मसले पर यूपी सरकार की आलोचना कर रहे हैं कि यह कदम मुसलमानों को परेशान करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को इन मदरसों के कामकाज में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि ये निजी मदरसे हैं। गौर करने वाली बात है कि ओवैसी जैसे नेता तो भारत की मुस्लिम जनता के रहनुमा बनते हैं, उन्होंने कभी मदरसों में शिक्षा नहीं पाई। खुद ओवैसी हैदराबाद के सबसे महंगे अंग्रेजी मीडियम स्कूल में पढ़े हैं। लेकिन सरकार जब मदरसों और मदरसों में दी जाने वाली शिक्षा को सुधारने की कवायद करती है तो तथाकथित मुस्लिम नेताओं को यह बात अखरती है। उन्हें लगाता है कि उनका वोट बैंक छीन जाएगा।

लेकिन जमाना तेजी से बदल रहा है। अब मुस्लिम कौम के अंदर से ही आवाजें उठने लगी हैं, मदरसों में सुधार की। शहर में नौकरी करने वाले मुस्लिम परिवार तो अब अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में एडमिशन करवाता है। वह मदरसे की शिक्षा से अपने बच्चों को दूर ही रखता है। गांवों में , कस्बों में भी लोग यह समझ गए हैं कि यदि बच्चों को आगे बढ़ना है तो मदरसों को भी आगे बढना होगा। मदरसों में बदलाव जरुरी है।

और आने वाले भविष्य में संभव हो सकता है कि सभी मदरसे एक दिन आधुनिक स्कूलों का रुप ले लें, औऱ जैसा कि असम के मुख्यमंत्री हेंमता बिस्व शर्मा चाहते हैं कि मदरसा शब्द ही खत्म हो जाए। एक दिन देश के सभी मदरसों का अस्तित्व ही विलीन हो जाए।

आज के लिए बस इतना ही। आपने अभी तक चैनल या पेज को सब्सक्राईब नहीं किया है तो जरुर करें। आपको हमारा पॉडकास्ट कैसा लगा…..इस बारे में कमेंट कर सकते हैं…इसे लेकर सुझाव दे सकते हैं…सुनो भई साधो में मैं फिर मिलूंगा….एक नए मुद्दे से आपको रुबरु कराने………तब तक के लिए आज्ञा दीजिए…..नमस्कार …आपका दिन शुभ हो।

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