
Draupadi Murmu Birthday: दृढ़ता से जीवन के थपेड़ों से लड़कर देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनने वाली द्रौपदी मुर्मु का आज अपना 65वां जन्मदिन मना रही हैं। इस मौके पर हर कोई देश की महामहिम को बधाई दे रहा है। वहीं, देश के प्रधानमंत्री ने भी राष्ट्रपति को ट्वीट कर उन्हें बधाई दीं। जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति अपने जन्मदिन पर बच्चों के साथ समय व्यतीत करेंगी। वे राष्ट्रपति भवन स्थित कल्याण केंद्र में कर्मचारियों के बच्चों और अमर ज्योति चैरिटेबल ट्रस्ट में अनाथ बच्चों के साथ जश्न मनाएंगी।
लोकतंत्र की जननी कहे जाने वाले भारत के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर संघर्षशील और विचारशील नारी का जन्म 20 जून 1958 को ओड़िशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में एक संथाल परिवार में हुआ था।

Draupadi Murmu का हिंदी भाषा से है खास रिश्ता
वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का हिंदी के प्रति प्रेम उनके संबोधन में झलकता है। अपने इसी प्रेम के चलते वह कई बार लिखित संबोधन से इतर बातें भी कह जाती हैं। उन्हें ऐसा न करने की सलाह भी दी गई, लेकिन वह कहती हैं कि क्यों न बोलूं? मुझे हिंदी से प्रेम है। उनके हिंदी प्रेम से राष्ट्रपति भवन का पुस्तकालय भी पुष्पित पल्लवित है। पुस्तकालय हिंदी की किताबों से पहले की अपेक्षा समृद्ध हुआ है। यहां एक शेल्फ का विस्तार संस्कृति, साहित्य की पुस्तकों के रूप में हुआ है।

Draupadi Murmu Birthday: बाकी सभी से अलग है देश की महामहिम
द्रौपदी मुर्मु अबतक के राष्ट्रपतियों से अलग हटकर हैं। इसका अहसास सबसे पहले राष्ट्रपति भवन के कर्मचारियों ने किया। मौका था मुर्मु के राष्ट्रपति बनने के बाद पहली दीपावली का। राष्ट्रपति भवन की रसोई में मिठास तैयार की जा रही थी। छोटी दीपावली से एक दिन पहले राष्ट्रपति रसोई में जाकर तैयारियों का जायजा लेती हैं। उन्हें बताया जाता है कि ये मिठाइयां सभी वरिष्ठ अधिकारियों को उपहार में दी जाएंगी।

Draupadi Murmu आम जनता को लाना चाहती हैं करीब
बताते चलें कि राष्ट्रपति की इच्छा है कि लोगों को राष्ट्रपति भवन के करीब लाया जाए, जिससे उन्हें इस ऐतिहासिक इमारत से भलीभांति परिचित होने का अवसर मिल सके। जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन पुस्तकालय को डिजिटाइज कराने की योजना बनाई है। आने वाले वक्त में इसको शोधकर्ताओं, यहां तक की आम लोगों के लिए भी ओपन करने की योजना है। इतना ही नहीं राष्ट्रपति भवन तक आम लोगों की पहुंच को और आसान करने के लिए भी कई योजनाओं पर काम किया जाएगा। यह उत्सव राष्ट्रीय राजधानी में स्थित राज्य भवनों तक सीमित राज्य दिवस उत्सव (Statehood Days) को भी मनाया जाएगा। इतना ही नहीं बच्चों और पेशेवरों के लिए राष्ट्रपति संपदा की खेल सुविधाओं को भी खोलने की संभावना है।
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