दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में 6 जनवरी की देर रात उस वक्त तनाव की स्थिति बन गई, जब रामलीला मैदान के पास स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के बाहर अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। यह अभियान हाई कोर्ट के निर्देश पर नगर निगम (MCD) और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने चलाया। जैसे ही बुलडोजर से अवैध निर्माण हटाने का काम शुरू हुआ, कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया, जिसके बाद मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
स्थिति को काबू में रखने के लिए प्रशासन ने इलाके में बीएनएस की धारा 163 लागू कर दी, जिसके तहत चार या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई। एहतियात के तौर पर पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
आधी रात को पहुंची टीम, बुलडोजर से हटाया गया अतिक्रमण
कार्रवाई के तहत MCD और पुलिस की टीमें करीब रात 12 बजे दर्जनों बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचीं। मस्जिद और दरगाह के बाहर सार्वजनिक भूमि पर बने अवैध ढांचों को हटाने का काम पूरी सुरक्षा के बीच शुरू किया गया। इस दौरान अतिक्रमण वाली जमीन पर बने एक बारात घर और दो मंजिला डायग्नोस्टिक सेंटर को ध्वस्त किया गया। प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल अदालत के आदेश का पालन करने के लिए उठाया गया और सिर्फ अवैध हिस्सों को ही हटाया गया।
नमाजियों की प्रतिक्रिया: ‘यह हिस्सा मस्जिद का ही था’
कार्रवाई के दौरान कई नमाजी मस्जिद से अपना सामान निकालते नजर आए। एबीपी न्यूज से बातचीत में उन्होंने अपनी नाराजगी और भावनाएं जाहिर कीं। एक नमाजी ने बताया कि वह बचपन से इसी इलाके में रह रहा है और यहीं नमाज अदा करता आया है। उनका दावा था कि जिस हिस्से को गिराया गया, वह मस्जिद परिसर का ही हिस्सा था, जहां पहले बैंक्वेट हॉल और डायग्नोस्टिक सेंटर चल रहे थे और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते थे।
कुछ नमाजियों ने कहा कि उन्हें इस बात की राहत है कि मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन कार्रवाई को जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया। साथ ही उन्होंने यह भी चिंता जताई कि मस्जिद में पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है, जिससे वजू करने में दिक्कत आ रही है।
MCD डिप्टी कमिश्नर का बयान
MCD के डिप्टी कमिश्नर विवेक अग्रवाल ने एबीपी न्यूज से एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि यह अभियान करीब छह घंटे तक चला और लगभग 80 प्रतिशत से अधिक अतिक्रमण हटा दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मस्जिद की संरचना को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया गया। केवल डायग्नोस्टिक सेंटर की दो मंजिला इमारत और बारात घर को गिराया गया है।
डिप्टी कमिश्नर के मुताबिक करीब 36 हजार वर्ग फुट जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि मस्जिद कमेटी की ओर से जमीन के स्वामित्व से जुड़े कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं किए गए। प्रशासन ने दोहराया कि पूरी कार्रवाई हाई कोर्ट के आदेश के तहत की गई है और मस्जिद पूरी तरह सुरक्षित है।









