1957 से चल रहे महाराष्ट्र कर्नाटक सीमा विवाद तूल पकड़ते जा रहा है। कर्नाटक में स्थित विवादित बेलगाम क्षेत्र का नाम बदलने पर उद्धव ठाकरे भड़ गए हैं उन्होंने केंद्र सरकार से केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने की अपील की थी। अब कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी ने कहा है कि कर्नाटक के लोग चाहते हैं कि मुंबई को उनके राज्य में शामिल किया जाए और जब तक ऐसा नहीं होता है तब तक इसे केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाए।

महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर किताब

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कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी

उद्धव ठाकरे ने एक बयान जारी कर कहा है कि, ‘बेलगाम इलाके में रहने वाले मराठी भाषियों पर हो रहे अत्याचार को देखते हुए, हमारी सरकार सुप्रीम कोर्ट से अपील करेगी कि जब तक मामला कोर्ट में है तब तक वह इस हिस्से को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करे। अब कर्नाटक के डिप्टी सीएम ने इसी का जवाब दिया है।’    

बता दें कि बुधवार को महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद को लेकर एक किताब जारी की थी। इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, एनसीपी चीफ शरद पवार, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बालासाहब थोराट और कुछ अन्य नेता मौजूद थे। इसी कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे ने कहा था कि कोर्ट में मामला होने के बावजूद कर्नाटक सरकार ने जानबूझकर विवादित बेलगाम क्षेत्र का नाम बदला। 

बॉम्बे प्रेसीडेंसी के नाम से जाता था

महाराष्ट्र और कर्नाटक सीमा विवाद काफी पुरना है। लंबे समय से दोनों राज्य की सरकारें इसे अपना घोषित करने में जुटी हैं। वहीं इस मामले का हल निकालने के लिए कोर्ट में लंबे समय से सुनवाई चल रही है। पर कोई ठोस नतीजा नहीं दिख रहा है।

देश आजाद होने से पहले पहले महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्य नहीं थे। उस समय बॉम्बे प्रेसीडेंसी और मैसूर स्टेट हुआ करते थे। अभी के कर्नाटक के कई इलाके तब बॉम्बे प्रेसीडेंसी का हिस्सा थे। आजादी के बाद राज्यों का बंटवारा शुरू हुआ और 1956 में राज्य पुनर्गठन कानून लागू हुआ तो बेलगाम को महाराष्ट्र की जगह मैसूर स्टेट का हिस्सा बना दिया गया और मैसूर स्टेट का नाम बदलकर 1973 में कर्नाटक हो गया। बेलगाम में मराठी बोलने वालों की संख्या काफी होने की वजह से इसे महाराष्ट्र का हिस्सा बनाने की मांग राज्य पुनर्गठन के समय से ही हो रही है।

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