इस्तीफे के बाद सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री सस्पेंड, विभागीय जांच के आदेश; जानें शंकराचार्य और UGC बिल से जुड़ा क्या है पूरा मामला

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उत्तर प्रदेश प्रशासन ने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब उन्होंने अपने पद से इस्तीफा भेजा था और कुछ संवेदनशील मुद्दों को लेकर गंभीर आरोपों की चर्चा सामने आई थी। शासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया तथ्यों के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई जरूरी समझी गई, इसलिए उन्हें सेवा से निलंबित किया गया है।

विभागीय जांच का जिम्मा कमिश्नर को

सरकार ने मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। बरेली मंडल के आयुक्त को विभागीय जांच सौंपी गई है, जो आरोपों और परिस्थितियों की समीक्षा करेंगे। निलंबन अवधि के दौरान अग्निहोत्री को नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। साथ ही, जांच पूरी होने तक उन्हें शामली जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध रखा गया है। इस संबंध में विशेष सचिव स्तर से औपचारिक आदेश जारी किए गए हैं।

इस्तीफे के पीछे विवादों की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, हाल में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े घटनाक्रम और यूजीसी बिल (UGC Bill) को लेकर उठे विवादों के बीच अलंकार अग्निहोत्री ने पद छोड़ने का निर्णय लिया था। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस्तीफे के कारणों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इस घटनाक्रम को प्रशासनिक नैतिकता और व्यक्तिगत रुख से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी।

अग्निहोत्री का प्रशासनिक करियर का सफर

19 मई 1982 को जन्मे अलंकार अग्निहोत्री ने बी.टेक और एलएलबी की पढ़ाई की है। वर्ष 2019 में पीसीएस सेवा में चयनित होने के बाद उन्होंने विभिन्न जिलों में जिम्मेदारियां निभाईं।

  • डिप्टी मजिस्ट्रेट, उन्नाव
  • डिप्टी मजिस्ट्रेट, बलरामपुर
  • डिप्टी मजिस्ट्रेट, एटा
  • असिस्टेंट म्युनिसिपल कमिश्नर, लखनऊ
  • सिटी मजिस्ट्रेट, बरेली
  • बताते चलें कि कानपुर नगर उनके गृह जनपद के रूप में दर्ज है।

सक्रिय फील्ड पोस्ट से इस्तीफा बना चर्चा का विषय

राज्य प्रशासन में किसी सक्रिय फील्ड पोस्ट पर तैनात अधिकारी का अचानक इस्तीफा देना असामान्य माना जाता है। ऐसे मामलों में आमतौर पर विस्तृत जांच की प्रक्रिया अपनाई जाती है, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रभाव डालने वाले पहलुओं को समझा जा सके।

अब नजर जांच रिपोर्ट पर

फिलहाल यह मामला विभागीय जांच के दायरे में है और अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। शासन का कहना है कि नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है और पारदर्शिता बनाए रखी जाएगी।