2006 मुंबई लोकल ट्रेन ब्लास्ट केस: बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी 12 लोगों को निर्दोष करार देते हुए किया बरी, रद्द किया निचली अदालत का फैसला

0
17

देश को दहला देने वाले 2006 मुंबई लोकल ट्रेन धमाकों के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने निचली अदालत के 2015 के फैसले को पलटते हुए ये फैसला सुनाया।

क्या था मामला?

11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में 11 मिनट के भीतर 7 सिलसिलेवार धमाके हुए थे। इन धमाकों में 189 लोगों की मौत हो गई थी और 827 लोग घायल हुए थे। यह हमला उस समय भारत में हुए सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक था।

महाराष्ट्र एटीएस ने इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया था और 15 आरोपी फरार बताए गए थे, जिनमें से कुछ के पाकिस्तान में छिपे होने की आशंका जताई गई थी।

निचली अदालत ने सुनाई थी फांसी और उम्रकैद

साल 2015 में विशेष अदालत ने इन 13 में से 12 लोगों को दोषी ठहराया था। इनमें से 5 को फांसी और 7 को उम्रकैद की सजा दी गई थी। इसके बाद सरकार ने फांसी की सजा की पुष्टि के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, वहीं दोषियों ने भी फैसले को चुनौती दी।

हाईकोर्ट में क्या हुआ?

जुलाई 2024 से छह महीने तक चली लगातार सुनवाई में आरोपियों के वकीलों ने कोर्ट में तर्क दिया कि जिन कबूलनामों के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया गया, वे महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत पुलिस की प्रताड़ना के बाद लिए गए थे। वकीलों ने कहा कि ये कबूलनामे पुलिस के दबाव में दर्ज किए गए और उनकी विश्वसनीयता संदिग्ध है।