पटना के अगमकुआं नगर थाने में मुफ्त में सब्जी नहीं देने पर नाबालिग को जेल भेजे जाने के मामले में जांच होने के बाद दो थानों के प्रमुखों समेत 11 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा एक अपर पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को ‘कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले दिनों 14 साल के बच्चे को जेल भेजे जाने के मामले की जांच का आदेश दिया था।
इस मामले की जांच के बाद पटना प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक नैय्यर हसनैन खान ने बताया कि अगमकुआं थाना के प्रभारी अध्यक्ष मुन्ना कुमार वर्मा को भी निलंबित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त अगमकुआं थाना के चार अन्य अवर निरीक्षक और दो आरक्षी और बाईपास थाना के तीन आरक्षी और एक अन्य अवर निरीक्षक को भी निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि अगमकुआं थाना की छवि ठीक नहीं होने के मद्देनजर उक्त थाना के सभी पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन बुला लिया गया है और वहां नए सिरे से पदस्थापन किया जा रहा है।
आरोपों के मुताबिक थाने के कुछ पुलिसकर्मियों की मुफ्त सब्जी लेने की आदत पड़ गई थी। इलाके में सब्जी विक्रेता के यहां से जबरन सब्जियां लेते और पैसे नहीं चुकाते थे। इसी दौरान 14 साल के एक बच्चे ने पुलिसकर्मियों को मुफ्त सब्जी देने से मना कर दिया। फिर क्या था पुलिस ने इसे अपना अपमान समझा और लड़के को उठा लिया ।
इसके बाद पुलिसवालों ने बड़ी चालाकी से 14 साल के नाबालिग की उम्र 18 साल दर्ज की। फिर उसके खिलाफ मामला बनाकर जेल भेज दिया। नाबालिग बच्चे के सब्जी विक्रेता पिता और बाकी परिजन इस बीच दौड़ भाग करते रहे। गरीब की इस दौरान किसी ने नहीं सुनी।
वहीं जब यह मामला मीडिया के संज्ञान में आया तो पुलिस के आलाधिकारियों के कान खड़े हुए। बात जब खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जानकारी में आई तो जांच टीम गठित की गई। इस जांच में पाया गया कि बच्चे की उम्र आधार कार्ड पर 14 साल दर्ज है। वहीं जांच में ये भी पता चला कि बच्चे को गलत मामले में फंसाया गया है।
पिता ने आशंकित होते हुए बताया कि पुलिस ने उनके बेटे को बहुत मारा। जांच के बाद पिता को भरोसा है कि उनका बेटा जल्दी ही छूट जाएगा। वहीं इस बात की आशंका भी है कि नाबालिग किशोर के मन पर जो घाव पुलिस वालों ने दिया है। उसका असर आजीवन उसकी जिंदगी पर पड़ सकता है।