देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न, दिवंगत अटल बिहारी वाजपेई के पैतृक गांव बटेश्वर के दिन अब बहुरने वाले हैं। योगी सरकार के दावों पर अगर यकीन करें, तो कम से कम ये कहा जा सकता है। दरअसल, अटलजी की अस्थियों को विसर्जित करने आगरा के बटेश्वर गांव पहुंचे, सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने इस बात का ऐलान किया है, कि सरकार की विकास योजनाओं के जरिए बटेश्वर की तस्वीर को चमकाने का काम किया जाएगा। एकेडमी बनाई जाएगी, स्मारक बनाए जाएंगे और सरकार की योजनाओं के जरिए बटेश्वर का कायाकल्प किया जाएगा।
सुनने में ये दिल को भले की सुकून पहुंचाता हो, लेकिन मौजूदा स्थिति इसके ठीक उलट नजर आती है। दरअसल, आजादी के 72 साल बाद भी गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। बिजली, पानी और खस्ताहाल सड़कें, यहां के लोगों के लिए आजभी जी का जंजाल है।वादे खूब किए गए, इलाके के सासंद चौधरी बाबूलाल ने इस गांव को गोद भी लिया।लेकिन अफसोस, हाल-बेहाल ही रहा। अटलजी के परिजन भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि वादे तो खूब किए गए लेकिन कोई भी वादा धरातल पर नहीं उतरा।
इन सवालों को बल इस बात से भी मिलता है कि आगरा को लेकर योगी सरकार ने भी कई घोषणाएं कीं, लेकिन उसपर अमल नहीं हो पाया। ऐसे में ये सवाल उठना भी लाजिमी है कि कहीं, मिशन 2019 से पहले अटलजी के नाम को भुनाने के लिए ये कोई सियासी हथकंडा तो नहीं है। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने भी इसी तरह के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बीजेपी अटल जी का नाम राजनीतिक रूप से इस्तेमाल कर रही है।
—ब्यूरो रिपोर्ट, एपीएन