उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान, तीन वर्षों में 21 प्रमुख परियोजनाएं हुईं पूरी

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उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और उसके आधुनिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। बीते लगभग तीन वर्षों में संस्कृति विभाग ने करीब 119.47 करोड़ रुपये की लागत से 21 प्रमुख सांस्कृतिक परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है। इन परियोजनाओं में रामलीला स्थलों का कायाकल्प, सांस्कृतिक केंद्रों का विकास, संग्रहालयों का आधुनिकीकरण, स्मारकों का निर्माण और कला-संगीत संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने जैसे कार्य शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ पर्यटन को भी नई दिशा देना है।

रामलीला स्थलों का हुआ व्यापक विकास

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश के अनेक जनपदों में सार्वजनिक रामलीला स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया गया है। मैनपुरी, गोरखपुर, बांदा, फिरोजाबाद, हरदोई, कुशीनगर, प्रतापगढ़, अलीगढ़ और बलिया सहित कई जिलों में रामलीला मैदानों का सौंदर्यीकरण किया गया है। इन स्थलों पर बाउंड्री वॉल, मंच, मुख्य प्रवेश द्वार, शेड, छायादार विश्राम स्थल और अन्य आवश्यक अधोसंरचना विकसित की गई है, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का स्तर बेहतर होगा।

सांस्कृतिक संस्थानों को मिला आधुनिक स्वरूप

प्रदेश सरकार ने केवल धार्मिक स्थलों तक ही विकास कार्य सीमित नहीं रखा, बल्कि सांस्कृतिक संस्थानों को भी नई पहचान देने का प्रयास किया है। चित्रकूट में महर्षि वाल्मीकि सांस्कृतिक केंद्र, आजमगढ़ के हरिहरपुर में संगीत महाविद्यालय, लखनऊ स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र के संग्रहालय का आंतरिक विकास तथा भारतेन्दु नाट्य अकादमी के नवीनीकरण का कार्य पूरा किया जा चुका है।

इसके अलावा शाहजहांपुर के स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय में फसाड लाइटिंग और म्यूजिकल फाउंटेन जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं, जबकि फतेहपुर में शहीद त्रिदेव प्रसाद स्मारक का निर्माण भी पूरा हो चुका है।

विरासत संरक्षण के साथ पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

सरकार ने प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। कन्नौज में अंतरराष्ट्रीय रोमा समुदाय को समर्पित स्मारक और मुक्ताकाशी मंच का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि बलिया के रसड़ा स्थित नाथ बाबा मेला मैदान में रिटेनिंग वॉल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य विकास कार्य पूरे कर लिए गए हैं।

इन परियोजनाओं से धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी।

सांस्कृतिक धरोहरों को मिलेगा स्थायी संरक्षण

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि अधिकांश परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी कर ली गई हैं और जल्द ही इन्हें आम जनता को समर्पित किया जाएगा। उनका कहना है कि इन विकास कार्यों से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक सुविधाओं के साथ संरक्षित किया जा सकेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखा जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन का राष्ट्रीय केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।