उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में संचालित कोचिंग संस्थानों को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्यभर में अवैध रूप से संचालित कोचिंग संस्थानों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य बिना पंजीकरण संचालित संस्थानों की पहचान करना, सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराना है।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जनपदों में संचालित कोचिंग संस्थानों का व्यापक सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वे के आधार पर ऐसे संस्थानों की सूची तैयार की जाएगी, जो उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकृत नहीं हैं। ऐसे संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार केवल अवैध संस्थानों तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पंजीकृत कोचिंग सेंटरों का भी विस्तृत निरीक्षण कराया जाएगा। निरीक्षण के दौरान भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था, विद्युत सुरक्षा, आपातकालीन निकास, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं की जांच की जाएगी। यदि किसी संस्थान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी या प्रशासनिक लापरवाही पाई जाती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। विद्यार्थियों और अभिभावकों का विश्वास बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रदेश का प्रत्येक कोचिंग संस्थान निर्धारित नियमों और गुणवत्ता मानकों का पालन करे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए सुरक्षित, व्यवस्थित और विश्वसनीय शैक्षिक वातावरण विकसित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य केवल बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार करना भी है जहां विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधाओं से किसी प्रकार का समझौता न हो।
इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग की ओर से विशेष सचिव निधि श्रीवास्तव ने सभी जिलाधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार बिना पंजीकरण संचालित संस्थानों की पहचान कर उनके विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पंजीकृत कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा, आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का समय-समय पर निरीक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि प्रभावी निगरानी और सख्त नियमन से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी, छात्रों का भरोसा मजबूत होगा और प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं को बेहतर एवं सुरक्षित शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।








