AAP में बड़ी टूट: राघव चड्ढा का इस्तीफा, BJP जॉइन करने का ऐलान; 7 सांसद साथ होने का दावा, बोले—गलत पार्टी में सही व्यक्ति था…

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आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका देते हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का ऐलान कर दिया है। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने न केवल दिल्ली बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल मचा दी है।

दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने अपने फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि वे लंबे समय से इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि वह “गलत पार्टी में सही व्यक्ति” हैं। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी के राज्यसभा के कुल 10 सांसदों में से 7 सांसद उनके साथ हैं और वे सभी सामूहिक रूप से बीजेपी में शामिल होंगे।

7 सांसदों के साथ जाने का दावा

राघव चड्ढा ने जिन सांसदों के नाम गिनाए, उनमें संदीप पाठक, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी, अशोक मित्तल, स्वाति मालीवाल (Swati Maliwal) और हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) शामिल बताए गए। चड्ढा ने कहा कि वे संविधान के प्रावधानों के तहत पार्टी विलय की प्रक्रिया अपनाएंगे।

यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह AAP के लिए संसद में एक बड़ी राजनीतिक क्षति होगी।

राघव ने क्यों छोड़ा आप का साथ ?

राघव चड्ढा ने 24 अप्रैल 2026 को आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने का फैसला लेते हुए कहा कि पार्टी की विचारधारा और नैतिकता अब पहले जैसी नहीं रही। उनका कहना था कि वह कथित भ्रष्टाचार और “गुनाहों” से खुद को अलग रखना चाहते हैं और लंबे समय से उन्हें लग रहा था कि वे “गलत पार्टी में सही व्यक्ति” हैं। चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व की सराहना भी की। उनके साथ कुछ अन्य राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने से यह कदम और बड़ा हो गया। साथ ही, पंजाब से जुड़े मुद्दों पर उनकी चुप्पी को लेकर भी पार्टी के भीतर सवाल उठते रहे थे, जिसने इस फैसले को और गति दी।

AAP की तीखी प्रतिक्रिया

इस घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इसे बीजेपी का “ऑपरेशन लोटस” करार दिया। पार्टी की ओर से राज्यसभा सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि जिन नेताओं को पार्टी ने राजनीतिक पहचान दी, वही अब पार्टी छोड़ रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम पंजाब और पार्टी समर्थकों के साथ विश्वासघात है। पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व, जिसमें अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) शामिल हैं, ने भी इस घटनाक्रम पर नाराजगी जताई और इसे राजनीतिक साजिश बताया।

राजनीतिक समीकरणों पर असर

राज्यसभा में AAP की संख्या और प्रभाव इस घटनाक्रम से प्रभावित हो सकता है। यदि वास्तव में 7 सांसद पार्टी छोड़ते हैं, तो यह न केवल संसद में बल्कि आगामी चुनावों में भी AAP की स्थिति को कमजोर कर सकता है।

दूसरी ओर, बीजेपी के लिए यह एक बड़ी राजनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे पार्टी को संसद में और मजबूती मिल सकती है।

क्या है आगे का रास्ता?

अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सभी बताए गए सांसद वास्तव में बीजेपी में शामिल होते हैं या नहीं। साथ ही, कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाएं भी इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभाएंगी।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में विपक्षी राजनीति और गठबंधन समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।

राघव चड्ढा का यह फैसला भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। जहां एक ओर AAP के लिए यह बड़ा झटका है, वहीं बीजेपी के लिए यह रणनीतिक लाभ के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस राजनीतिक बदलाव का असर किस हद तक दिखाई देता है।

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