अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की मौत, सेना ने की मौत की पुष्टि; ट्रंप बोले- सबसे क्रूर व्यक्ति…

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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की आधिकारिक पुष्टि कर दी गई है। ईरानी सेना, सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए (IRNA) और राष्ट्रीय प्रसारक र = प्रेस टीवी (Press TV) के अनुसार, अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमले में खामेनेई की मृत्यु हुई है। इस हमले में उनके परिवार के चार सदस्यों और एक वरिष्ठ सलाहकार के भी मारे जाने की पुष्टि की गई है।

संयुक्त हवाई हमले में मौत, ईरान ने दी आधिकारिक जानकारी

ईरानी पक्ष के अनुसार, हमला उस समय किया गया जब खामेनेई तेहरान स्थित अपने आधिकारिक कार्यालय में मौजूद थे। इस्लामिक रेवोलुशनरी इस्लामिक कॉर्प्स [Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC)] ने एक आधिकारिक बयान जारी कर खामेनेई की मृत्यु को “शहादत” बताया और कहा कि उनका वैचारिक मार्ग आगे भी जारी रहेगा। बयान में अमेरिका और “ज़ायोनी शासन” को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है और कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

ट्रंप और नेतन्याहू के बयान, वैश्विक प्रतिक्रियाएं तेज

हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए खामेनेई को “इतिहास के सबसे क्रूर व्यक्तियों में से एक” बताया और उनकी मौत को ईरानी जनता के लिए “स्वतंत्रता का अवसर” करार दिया।

वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने संकेत दिया कि यह कार्रवाई एक सटीक और सुनियोजित “सर्जिकल स्ट्राइक” थी, जिसे खुफिया जानकारी और अत्याधुनिक हथियारों के सहारे अंजाम दिया गया।

ईरान में राष्ट्रीय शोक, सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू

खामेनेई की मौत के बाद ईरान सरकार ने 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। इसके साथ ही एक सप्ताह के सार्वजनिक अवकाश का भी ऐलान किया गया है। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रमुख सरकारी व सैन्य ठिकानों पर हाई अलर्ट घोषित है।

ईरानी सेना ने नए कमांडर-इन-चीफ के रूप में अहमद वाहिदी के नाम की घोषणा कर दी है, जिससे संकेत मिलता है कि सत्ता और सैन्य नियंत्रण को लेकर त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं।

खामेनेई का कार्यकाल: टकराव, परमाणु कार्यक्रम और विरोध

86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई ने 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी की मृत्यु के बाद ईरान की बागडोर संभाली थी। उनके कार्यकाल में ईरान का परमाणु कार्यक्रम तेज़ी से आगे बढ़ा और अमेरिका-इज़रायल के साथ टकराव लगातार गहराता गया।

खामेनेई के दौर में रिवोल्यूशनरी गार्ड और क्षेत्रीय प्रॉक्सी नेटवर्क मजबूत हुए, लेकिन देश के भीतर आर्थिक संकट और राजनीतिक दमन के खिलाफ कई बड़े आंदोलन भी हुए। 2022 का महसा अमीनी आंदोलन उनके शासन की सबसे बड़ी चुनौतियों में गिना जाता है।

युद्ध का असर: उड़ानें रद्द, क्षेत्र में अस्थिरता

ईरान-इज़रायल टकराव के बाद पश्चिम एशिया के कई हवाई मार्ग बाधित हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रद्द होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भारत समेत कई देशों के हवाई अड्डों पर विदेशी यात्री फंसे नजर आए।

खामेनेई की मौत ने पश्चिम एशिया को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है। ईरान की बदले की चेतावनी और अमेरिका-इज़रायल की सैन्य तैयारियों के बीच वैश्विक समुदाय की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि यह संकट सीमित टकराव तक रहेगा या व्यापक युद्ध में तब्दील होगा।