Vijay Mallya: यूबीएस बैंक ने लंदन में भगोड़े व्यवसायी विजय माल्या (Vijay Mallya) के लक्जरी घर को बेचने का अधिकार हासिल किया है। यहां विजय माल्या अपने बेटे और 95 वर्षीय मां के साथ रहता है। विजय माल्या का ये आलिशान घर लंदन में रीजेंट पार्क के सामने है। स्विस बैंक यूबीएस के साथ लंबे समय से चल रहे विवाद में ब्रिटिश अदालत में भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या कानूनी लड़ाई हार गए हैं। उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि माल्या परिवार को यूबीएस को 20.4 मिलियन पाउंड का ऋण चुकाने के लिए और समय देने के लिए उसके पास कोई आधार नहीं है।

डिप्टी मास्टर मार्श ने सुनाया Vijay Mallya के खिलाफ फैसला
न्यायाधीश ने विजय माल्या को अपने आदेश के खिलाफ अपील करने या प्रवर्तन पर अस्थायी रोक लगाने की अनुमति देने से भी इनकार कर दिया है। जिससे अब पता चलता है कि यूबीएस आलिशान घऱ कब्जे की प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ सकता है। मार्श ने कहा कि माल्या को अब किसी अदालत में अपील करने की अनुमति नहीं है। वहीं माल्या के वकील डैनियल मार्गोलिन क्यूसी ने कहा कि 65 वर्षीय व्यवसायी ने उच्च न्यायालय के चांसरी डिवीजन के न्यायाधीश के समक्ष अपील करने की योजना बनाई है। क्योंकि विजय माल्या के घर में उसकी बुजुर्ग मां भी शामिल है।
Vijay Mallya की कंपनी Kingfisher Airlines ने बैंको से लिया था ऋण
बता दें कि यह मामला विजय माल्या की कंपनियों में से एक, रोज कैपिटल वेंचर्स द्वारा लिए गए एक बंधक से संबंधित है, जिसमें किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व बॉस, उनकी मां ललिता और बेटे सिद्धार्थ माल्या को संपत्ति के कब्जे के अधिकार के साथ परिवार के रूप में लिस्ट किया गया था। मई 2019 में न्यायाधीश साइमन बार्कर ने एक सहमति आदेश दिया था, जिसमें परिवार को ऋण की अदायगी के लिए दी गई 30 अप्रैल, 2020 की अंतिम समय सीमा के साथ कब्जा बनाए रखने की अनुमति दी गई थी। उस समय माल्या सीमा को पूरा करने में विफल रहा था। माल्या COVID-19 महामारी की अवधि में विशेष कानूनी दाव-पेंच के साथ इस मामले में बचता रहा है लेकिन अब यूबीएस को अब अदालत से उसके घर पर कब्जा करने का अधिकार मिल गया है।

Vijay Mallya पर 9 हजार करोड़ रुपये की धोखाधरी का आरोप
गौरतलब है कि बैंक ने पिछले साल अक्टूबर में प्रवर्तन के लिए अदालत के आदेश की मांग की थी, तो माल्या ने इस आधार पर रोक का आवेदन दायर किया कि बैंक ने पारिवारिक ट्रस्ट फंड के माध्यम से रकम चुकाने के लिए उनके रास्ते में “अनुचित बाधाएं” रखी थीं। उनकी कानूनी टीम ने एक गैर-बाध्यकारी पत्र भी प्रस्तुत किया जिसमें दावा किया गया था कि एक कंपनी संपत्ति का अधिग्रहण करने को तैयार है, जो ऋण का भुगतान करने में मदद करेगी।
बता दें कि इससे पहले मई 2019 के आदेश के तहत, यूबीएस को “कब्जे का तत्काल अधिकार” दिया गया था और माल्या और सह-प्रतिवादियों को “कब्जा देने की तारीख को स्थगित करने या निलंबित करने” के लिए कोई और आवेदन करने की अनुमति नहीं थी। वहीं अदालत के आदेश ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व में भारतीय बैंकों के एक संघ ने माल्या के खिलाफ दिवालिएपन की कार्रवाई से उत्पन्न होने वाले किसी भी अन्य दावे को भी मना कर दिया, जो कार्रवाई पिछले साल जुलाई में दिवालियापन आदेश में संपन्न हुई थी। बता दें कि माल्या भारत में अपनी अब बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए ऋण से संबंधित कथित 9,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी हैं।
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