चीन ने ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को ठुकराया ! UN चार्टर का हवाला देकर दी दो-टूक प्रतिक्रिया

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षी पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहला बड़ा झटका लगा है। चीन ने इस प्रस्तावित बोर्ड में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। गाजा में शांति स्थापना और युद्ध के बाद पुनर्निर्माण की निगरानी के लिए बनाए जा रहे इस बोर्ड को लेकर चीन ने स्पष्ट किया कि वह संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर आधारित वैश्विक व्यवस्था से ही संचालित होता है।

भारत में स्थित चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चीन को अमेरिका की ओर से बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का निमंत्रण मिला था, लेकिन बीजिंग ने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन “सच्चे बहुपक्षवाद” में विश्वास करता है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका को कमजोर करने वाले किसी भी ढांचे का समर्थन नहीं करता।

यू जिंग के मुताबिक, वैश्विक राजनीति में चाहे जितने भी बदलाव हों, चीन हमेशा संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखकर बनी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय कानूनों और यूएन चार्टर के उद्देश्यों व सिद्धांतों की रक्षा करता रहेगा। उनके इस बयान को अमेरिका की एकतरफा पहल पर सीधी टिप्पणी के तौर पर देखा जा रहा है।

दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने वेस्ट एशिया में लंबे समय से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक 20-सूत्रीय शांति योजना पेश की है। इसी योजना के दूसरे चरण के तहत ‘गाजा बोर्ड ऑफ पीस’ का प्रस्ताव रखा गया है। इसका उद्देश्य गाजा पट्टी में संघर्षविराम के बाद शांति, स्थिरता और पुनर्निर्माण प्रक्रिया की निगरानी करना है। यह बोर्ड शासन व्यवस्था को मजबूत करने, बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण, निवेश आकर्षित करने और अंतरराष्ट्रीय फंडिंग जुटाने जैसे अहम क्षेत्रों में काम करेगा।

व्हाइट हाउस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस बोर्ड में शामिल होने वाले देशों को गाजा के भविष्य से जुड़े फैसलों में भूमिका मिलेगी। खास बात यह है कि जो देश 1 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान करेंगे, उन्हें बोर्ड की स्थायी सदस्यता देने का प्रावधान रखा गया है। हालांकि, बिना वित्तीय योगदान के भी देश तीन साल के लिए बोर्ड का हिस्सा बन सकते हैं।

बता दें कि चीन ने मंगलवार (20 जनवरी) को इस बात की पुष्टि की कि उसे अमेरिका से शांति बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण मिला है, लेकिन उस समय इसमें शामिल होने पर कुछ नहीं कहा था।

कुल मिलाकर, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर अमेरिका और चीन के बीच वैचारिक मतभेद एक बार फिर सामने आ गए हैं—जहां एक ओर वॉशिंगटन नई वैश्विक संरचना की बात कर रहा है, वहीं बीजिंग संयुक्त राष्ट्र केंद्रित व्यवस्था पर अडिग नजर आ रहा है।