पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। एक ओर ईरान इजराइल और अमेरिका (US-इजराइल Vs ईरान) के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर एशिया की बड़ी शक्ति चीन (China) ने अपने रक्षा बजट में बड़ा इजाफा कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
चीन ने गुरुवार को अपने रक्षा बजट में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इसके साथ ही देश का सैन्य खर्च बढ़कर लगभग 275 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। यह वृद्धि पिछले वर्ष की तुलना में करीब 25 अरब डॉलर से अधिक है और इसे चीन की सैन्य क्षमताओं के तेजी से विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नेशनल पीपुल्स कांग्रेस में हुआ ऐलान
चीन के प्रधानमंत्री ली क्यांग (Li Qiang) ने देश की संसद नेशनल पीपल्स कांग्रेस (National People’s Congress) में पेश अपनी वार्षिक वर्क रिपोर्ट में इस बजट वृद्धि की घोषणा की। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय रक्षा के लिए लगभग 1.9 ट्रिलियन युआन का आवंटन किया जाएगा, जो अमेरिकी डॉलर में करीब 275 अरब के बराबर है।
विश्लेषकों के अनुसार यह कदम केवल सैन्य खर्च बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य चीन की सेना (PLA) का व्यापक आधुनिकीकरण भी है।
अमेरिका की बराबरी की रणनीति
चीन का रक्षा बजट दुनिया में दूसरे स्थान पर है, जबकि पहला स्थान अमेरिका का है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग लंबे समय से अपनी सैन्य ताकत को इस स्तर तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है, जहां वह अमेरिकी सैन्य प्रभुत्व को चुनौती दे सके।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन अपने नौसैनिक बेड़े, मिसाइल सिस्टम, साइबर युद्ध क्षमता और अंतरिक्ष रक्षा कार्यक्रमों पर तेजी से निवेश कर रहा है। इसके अलावा, अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, हाइपरसोनिक मिसाइल और ड्रोन तकनीक पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पिछले वर्षों में लगातार बढ़ रहा सैन्य खर्च
चीन पिछले कई वर्षों से अपने रक्षा बजट में लगातार बढ़ोतरी कर रहा है।
- 2024: रक्षा बजट करीब 232 अरब डॉलर
- 2025: बजट बढ़कर लगभग 249 अरब डॉलर
- 2026: बढ़ोतरी के बाद लगभग 275 अरब डॉलर
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि चीन की सैन्य रणनीति दीर्घकालिक है और वह क्षेत्रीय व वैश्विक प्रभाव को मजबूत करने के लिए लगातार संसाधन झोंक रहा है।
पड़ोसी देशों में बढ़ी चिंता
चीन की इस सैन्य विस्तार नीति से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों में चिंता बढ़ी है। खासकर भारत, जापान और दक्षिण कोरिया (India, Japan, South Korea) जैसे देश अपनी सुरक्षा रणनीतियों की समीक्षा कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का रक्षा बजट भारत के रक्षा खर्च से लगभग तीन गुना तक अधिक है, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर भी असर पड़ सकता है।
वैश्विक तनाव के बीच रणनीतिक संदेश
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने पहले ही दुनिया को अस्थिर कर रखा है। ऐसे समय में चीन का रक्षा बजट बढ़ाना केवल आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संकेत भी माना जा रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार बीजिंग यह दिखाना चाहता है कि वह वैश्विक शक्ति संतुलन में अपनी भूमिका को और मजबूत करने के लिए तैयार है। साथ ही यह कदम संभावित सुरक्षा चुनौतियों के लिए पहले से तैयारी का भी संकेत देता है।
आगे क्या?
वैश्विक राजनीति में तेजी से बदलते समीकरणों के बीच चीन का यह फैसला आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। रक्षा बजट में यह वृद्धि केवल सैन्य क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया की शक्ति राजनीति में चीन की महत्वाकांक्षा को भी दर्शाती है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा का जवाब किस तरह देते हैं।









