हर नागरिक को पेंशन का लाभ देने की तैयारी, रोजगार की अनिवार्यता नहीं

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हर नागरिक को पेंशन का लाभ देने की तैयारी
हर नागरिक को पेंशन का लाभ देने की तैयारी

केंद्र सरकार एक यूनिवर्सल पेंशन स्कीम लाने की योजना बना रही है, जो स्वैच्छिक (Voluntary) और अंशदायी (Contributory) होगी। इस योजना में शामिल होने के लिए रोजगार की कोई शर्त नहीं होगी, यानी कोई भी नागरिक इसमें योगदान कर पेंशन का लाभ उठा सकेगा। सरकार का उद्देश्य इस नई पहल के जरिए पारंपरिक रोजगार से इतर सामाजिक सुरक्षा (Social Security) का विस्तार करना है। NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने इस प्रस्तावित समग्र योजना (Umbrella Scheme) पर मंथन शुरू कर दिया है, जो मौजूदा पेंशन योजनाओं को एकीकृत करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

यूनिवर्सल पेंशन स्कीम के संभावित प्रावधान

  • यह योजना कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत लागू की जाएगी।
  • अंतिम प्रारूप तैयार होने के बाद विभिन्न हितधारकों (Stakeholders) से सुझाव लिए जाएंगे।
  • यह योजना स्वैच्छिक होगी, यानी कोई भी व्यक्ति, चाहे वह नौकरीपेशा हो या न हो, इसमें भाग ले सकता है।
  • असंगठित क्षेत्र के मजदूर, छोटे व्यापारी और स्वरोजगार करने वाले इस योजना से लाभान्वित हो सकेंगे।
  • सरकार इसमें प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) और राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS-Traders) जैसी मौजूदा योजनाओं को मर्ज कर सकती है।
  • मौजूदा योजनाओं की तरह, इसमें भी रिटायरमेंट के बाद ₹3,000 मासिक पेंशन दी जा सकती है, जिसमें ₹55 से ₹200 तक का मासिक योगदान होगा, और सरकार इसमें समान अंशदान देगी।
  • अटल पेंशन योजना (APY) को भी इस नए ढांचे में शामिल किए जाने की संभावना है।
  • सरकार निर्माण श्रमिकों की पेंशन को वित्तीय सहायता देने के लिए Building and Other Construction Workers (BoCW) Act के तहत लिए गए उपकर (Cess) का उपयोग करने पर विचार कर रही है।

किन लोगों को होगा फायदा?

यह योजना असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, छोटे व्यापारियों, स्वरोजगार करने वालों और अन्य आम नागरिकों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।

  • इसमें 18 वर्ष से अधिक उम्र के वे लोग शामिल हो सकते हैं, जो 60 वर्ष के बाद पेंशन का लाभ लेना चाहते हैं।
  • केंद्र सरकार राज्यों को इस योजना में अपनी मौजूदा पेंशन योजनाओं को विलय करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।
  • इससे पेंशन अंशदान को केंद्रीकृत किया जा सकेगा, जिससे पेंशन भुगतान में वृद्धि होगी और किसी व्यक्ति को एक से अधिक पेंशन योजनाओं का लाभ लेने से रोका जा सकेगा।

भारत में वृद्ध आबादी का बढ़ता दबाव

अनुमानों के अनुसार, 2036 तक भारत में 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 22.7 करोड़ तक पहुंच सकती है, जो देश की कुल जनसंख्या का 15 प्रतिशत होगी। 2050 तक यह आंकड़ा 34.7 करोड़ (कुल आबादी का 20%) तक पहुंचने की संभावना है।

  • इसके विपरीत, अमेरिका, कनाडा, यूरोप, रूस और चीन जैसे देशों में पहले से ही सामाजिक सुरक्षा प्रणाली (Social Security System) मौजूद है। इनमें पेंशन, स्वास्थ्य सेवाएं और बेरोजगारी भत्ता जैसी सुविधाएं दी जाती हैं।
  • डेनमार्क, स्वीडन, नॉर्वे, नीदरलैंड्स और न्यूजीलैंड में यूनिवर्सल पेंशन योजनाएं पहले से ही लागू हैं।

भारत में मौजूदा सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था

फिलहाल भारत में सामाजिक सुरक्षा प्रणाली मुख्य रूप से भविष्य निधि (Provident Fund), वृद्धावस्था पेंशन (Old Age Pension) और गरीब वर्गों के लिए स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) तक सीमित है।
इस प्रस्तावित यूनिवर्सल पेंशन स्कीम का उद्देश्य इन योजनाओं के दायरे को बढ़ाना और एक समावेशी (Inclusive) और स्थायी (Sustainable) पेंशन प्रणाली विकसित करना है, ताकि अधिक से अधिक नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सके।