नवी मुंबई में सानपाड़ा में NMMC की तोड़फोड़ कार्रवाई पर बवाल, ‘चयनात्मक कार्रवाई’ के आरोप; वार्ड अधिकारी सागर मोरे पर उठे सवाल

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By: सर्वजीत सोनी

नवी मुंबई के सानपाड़ा स्थित करीब 20 साल पुरानी शिव शंकर टॉवर को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में नवी मुंबई महानगरपालिका (NMMC) द्वारा की गई तोड़फोड़ कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोसाइटी के निवासी और दुकानदारों ने आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना और चयनात्मक तरीके से की गई है, जिससे निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 में जारी नोटिस नंबर 5139 में शॉप नंबर 5, 6, 7 और 8 के साथ-साथ फ्लैट नंबर 203, 504, 802 और 10वीं मंजिल पर कथित अनियमितताओं और अतिक्रमण का उल्लेख किया गया था।

इसके अलावा, फ्लैट नंबर 101 को लेकर भी एक अलग नोटिस जारी किया गया था, जिसमें सोसाइटी की कॉमन टेरेस पर अतिक्रमण की बात कही गई थी।

हालांकि, 18 फरवरी और 4 मार्च 2026 को की गई तोड़फोड़ कार्रवाई के दौरान कथित रूप से केवल कुछ चुनिंदा दुकानों पर ही कार्रवाई की गई, जबकि उसी नोटिस में जिन अन्य दुकानों और फ्लैट्स का उल्लेख किया गया था, उनके खिलाफ न तो जांच की गई और न ही कोई कार्रवाई की गई। इसी कारण निवासियों ने इस कार्रवाई को चयनात्मक और लक्षित कार्रवाई बताया है।

सोसाइटी की सचिव एडवोकेट रेखा चौधरी ने कहा कि उनका उद्देश्य अन्य दुकानों या फ्लैट्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग करना नहीं है, बल्कि यह जानना है कि जब नोटिस में कई यूनिट्स का जिक्र था तो कार्रवाई केवल कुछ दुकानों तक ही क्यों सीमित रखी गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, जो सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है, उसके खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जिन दुकानों पर कार्रवाई की गई, उनमें से कई को पहले से कोई नोटिस नहीं दिया गया, जिससे वे अपने कीमती सामान और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित नहीं कर सके।

रेखा चौधरी ने इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, एनएमएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर इस कार्रवाई की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।

निवासियों ने कार्रवाई के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अधिकारी बड़ी पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे और बाद में शाम करीब 7:30 बजे भारी मशीनरी के साथ दोबारा लौटे, जिसके बाद रात लगभग 9 बजे तक तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई। प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्हें नोटिस और प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

दुकानदार जयेश त्रिपाठी और महेश्वरी त्रिपाठी, जिनकी दुकानों पर कार्रवाई हुई, ने कहा कि भारी मशीनों से की गई तोड़फोड़ से इमारत की संरचना कमजोर हो सकती है, क्योंकि यह इमारत पहले से ही 20 साल से अधिक पुरानी है। उनका कहना है कि अनियंत्रित तरीके से की गई कार्रवाई से इमारत के पिलर और बीम पर भी असर पड़ सकता है, जिससे सभी निवासियों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

इमारत में सैलून चलाने वाली महिला उद्यमी परवीन तरवाडिया ने कहा कि अचानक हुई इस कार्रवाई से उनका व्यवसाय और परिवार की आजीविका खतरे में पड़ गई है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने व्यवसाय में भारी कर्ज लेकर निवेश किया है और अब उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है।

इस मामले में नवी मुंबई महानगरपालिका के सानपाड़ा स्थित डी वार्ड (तुर्भे) के वार्ड अधिकारी श्री सागर मोरे (कार्यालय – अण्णाभाऊ साठे भवन, सेक्टर-10, सानपाड़ा, नवी मुंबई – 400705) ने इस विषय पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने पत्रकारों को एनएमएमसी के कार्यकारी अभियंता विनोद आंबरे से संपर्क करने के लिए कहा।

कार्यकारी अभियंता विनोद आंबरे ने बताया कि निगम को शिकायत प्राप्त हुई है और नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी प्रतिष्ठानों और फ्लैट्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि नोटिस में अन्य यूनिट्स का उल्लेख होने के बावजूद कार्रवाई केवल कुछ दुकानों तक ही क्यों सीमित रही।

फिलहाल, शिव शंकर टॉवर के निवासियों का कहना है कि यह मामला अब केवल एक तोड़फोड़ कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि नवी मुंबई में नागरिक कार्रवाई की पारदर्शिता, समानता और निष्पक्षता को लेकर बड़ा सवाल बन गया है। सोसाइटी के सदस्यों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि कार्रवाई किस आधार पर और किन परिस्थितियों में की गई।