जलगांव जिले में उजागर हुआ कॉल सेंटर रैकेट अब केवल स्थानीय अपराध नहीं रहा। पुलिस जांच में सामने आया है कि इसका नेटवर्क तीन राज्यों और अंतरराष्ट्रीय ठगी से जुड़ा है। इस मामले में कई आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि मास्टरमाइंड माने जा रहे तीन प्रमुख आरोपी – अकबर, आदिल और इमरान – अब भी फरार हैं।
कैसे हुआ खुलासा?
रविवार (28 सितंबर) को पुलिस ने ममुराबाद रोड स्थित पूर्व महापौर ललित कोल्हे के एल.के. फार्महाउस पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने ललित विजयराव कोल्हे (कोल्हेनगर, जलगांव), नरेंद्र चंदू अगारिया, राकेश चंदू अगारिया, शाहबाज आलम, शाकिब आलम (कोलकाता, पश्चिम बंगाल), जिशान नुरी, हाशिर रशिद, एक रसोइया और अलीभाई को गिरफ्तार किया।
शुरुआत में मामला साधारण फर्जी कॉल सेंटर का लग रहा था, लेकिन जांच गहराई में गई तो पता चला कि यह नेटवर्क कहीं ज्यादा बड़ा और खतरनाक है।
विदेशी नागरिक बने शिकार
जांच में सामने आया है कि इस कॉल सेंटर से इंग्लैंड, अमेरिका और यूरोप के नागरिकों को कॉल किया जाता था। संदिग्ध खुद को बड़ी कंपनियों या वित्तीय एजेंसियों का प्रतिनिधि बताकर विदेशी ग्राहकों को फंसाते थे और उनसे ऑनलाइन पेमेंट कराते थे।
ठगी से हासिल रकम को पहले डॉलर और यूरो में लिया जाता, फिर उसे क्रिप्टोकरेंसी में कन्वर्ट किया जाता और अंततः हवाला नेटवर्क के जरिए भारत लाया जाता था। यानी यह गिरोह एक साथ साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग दोनों में सक्रिय था।

मुंबई से मिलते थे निर्देश
पुलिस के अनुसार, इस रैकेट का असली संचालन मुंबई से किया जा रहा था। वहां बैठे तीन मास्टरमाइंड – अकबर, आदिल और इमरान – पूरी गतिविधियों को नियंत्रित कर रहे थे।
इनके अधीन करीब 25 युवक काम कर रहे थे जिन्हें झूठे कॉल और विदेशी ग्राहकों को फंसाने की ट्रेनिंग दी गई थी। ये ज्यादातर बेरोजगार थे और आसान पैसे के लालच में अपराध से जुड़ गए।
ललित कोल्हे और मास्टरमाइंड का संपर्क
इस नेटवर्क का प्रमुख राकेश बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, ललित कोल्हे और राकेश के बीच लगातार बातचीत होती थी। फोन रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्य इस ओर इशारा करते हैं कि ललित कोल्हे नेटवर्क से सीधे तौर पर जुड़े हुए थे। इससे यह संदेह और गहराता है कि रैकेट को राजनीतिक और आर्थिक संरक्षण भी मिल रहा था।
तीन राज्यों तक फैला जाल
जांच अधिकारियों ने दावा किया है कि इस रैकेट की जड़ें पश्चिम बंगाल, राजस्थान और महाराष्ट्र में फैली हैं।
पश्चिम बंगाल : कोलकाता से जुड़े आरोपी ट्रेनिंग और तकनीकी सपोर्ट उपलब्ध कराते थे।
राजस्थान : हवाला चैनल सक्रिय था, जिसके जरिए ठगी की रकम घुमाई जाती थी।
महाराष्ट्र : ऑपरेशन बेस के तौर पर जलगांव का फार्महाउस और कॉल सेंटर इस्तेमाल किया जा रहा था।
स्पष्ट है कि यह सिर्फ एक स्थानीय कॉल सेंटर नहीं बल्कि इंटर-स्टेट और इंटरनेशनल नेटवर्क था।
पुलिस की चुनौती
जलगांव पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती है इस नेटवर्क की मनी ट्रेल को पकड़ना। ठगी से कमाई रकम किन रास्तों से होकर भारत आई और किन-किन खातों में पहुंची – इसकी जांच जारी है।
पुलिस अब क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स, हवाला ऑपरेटर और अंतरराज्यीय कड़ियों की छानबीन कर रही है। वहीं फरार तीनों आरोपी अकबर, आदिल और इमरान और योगेश लोहार(मुख्य मास्टरमाइंड) की तलाश के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं।









