जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का रविवार, 5 अगस्त को निधन हो गया। 78 वर्षीय मलिक लंबे समय से बीमार चल रहे थे और मई 2025 से दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में भर्ती थे। उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी और उन्हें मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI) व किडनी फेल्योर की जटिलताओं के चलते आईसीयू में रखा गया था। आज दोपहर अस्पताल प्रशासन ने उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि की।
राजनीतिक जीवन में कभी भाजपा के कद्दावर नेता रहे सत्यपाल मलिक बाद में केंद्र सरकार के आलोचक के रूप में भी सुर्खियों में रहे। उनके निधन की खबर से राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का भी दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में निधन हो गया था। सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। अब सत्यपाल मलिक के निधन ने एक और वरिष्ठ नेता को देश से विदा कर दिया।
किडनी की समस्या से जूझ रहे थे मलिक
सत्यपाल मलिक काफी समय से किडनी से संबंधित दिक्कतों से पीड़ित थे। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कृषि आंदोलन, भ्रष्टाचार और तमाम ज्वलंत राष्ट्रीय मुद्दों पर मुखर राय रखने के लिए पहचान बनाई थी।
अनुच्छेद 370 हटने के वक्त थे जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल
2019 में जब अनुच्छेद 370 और 35A हटाए गए थे, उस वक्त सत्यपाल मलिक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे। बाद में जब प्रदेश को केंद्र शासित क्षेत्र में बदला गया, तब उन्हें वहां का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया।
सत्यपाल मलिक: जाट समुदाय से निकले नेता, छात्र राजनीति से लेकर संसद तक का सफर
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का जन्म 24 जुलाई 1946 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के हिसवाड़ा गांव में एक जाट परिवार में हुआ था। उन्होंने मेरठ कॉलेज से विज्ञान में स्नातक और कानून (LLB) की डिग्री प्राप्त की। राजनीति में उनकी शुरुआत छात्र जीवन से हुई, जब 1968-69 में वे मेरठ कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए।
इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और 1974 से 1977 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। 1980 से 1989 के बीच उन्होंने राज्यसभा में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। 1989 में जनता दल के उम्मीदवार के रूप में अलीगढ़ से नौवीं लोकसभा के सांसद बने। सत्यपाल मलिक का राजनीतिक जीवन विविध जिम्मेदारियों और महत्वपूर्ण पड़ावों से होकर गुज़रा।
कई पार्टियों से जुड़ाव
अपने राजनीतिक जीवन में मलिक ने कई दलों का दामन थामा। इनमें भारतीय क्रांति दल, जनता दल, कांग्रेस, लोकदल, सपा और भाजपा शामिल हैं। 2012 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था।
राज्यपाल के तौर पर कई राज्यों में दी सेवा
सितंबर 2017 से अगस्त 2018 तक वह बिहार के राज्यपाल रहे। इसके बाद ओडिशा के प्रभारी राज्यपाल के तौर पर भी कार्यभार संभाला। अगस्त 2018 से अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर, नवंबर 2019 से अगस्त 2020 तक गोवा और फिर अगस्त 2020 से अक्टूबर 2022 तक मेघालय के राज्यपाल रहे।
सियासत और समाज का शोक
सत्यपाल मलिक के निधन पर राजनीतिक, सामाजिक और किसान संगठनों से जुड़ी हस्तियों ने दुख प्रकट किया है। अखिलेश यादव ने लिखा, “पूर्व राज्यपाल श्री सत्यपाल मलिक जी का निधन अत्यंत दुःखद है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे। एक निर्भीक और स्पष्टवादी आवाज अब हमारे बीच नहीं रही।”
राकेश टिकैत ने उन्हें किसानों की बुलंद आवाज बताया और दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी। केसी त्यागी ने इसे निजी क्षति बताया और कहा कि मलिक की आवाज पश्चिमी यूपी में लंबे समय तक गूंजती रही। साथ ही रालोद नेता रोहित अग्रवाल और कांग्रेस नेता बृजेंद्र सिंह ने भी उनकी किसान पक्षधर छवि को याद किया। तारिक अनवर ने उन्हें सत्य और लोकतंत्र के लिए खड़े होने वाला व्यक्ति बताया।
दक्षिण भारत से भी श्रद्धांजलि
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “वो व्यक्ति जो सत्ता के पद पर रहते हुए भी सत्ता के खिलाफ सच बोलने का साहस रखता था, अब नहीं रहा। उनका साहस इतिहास में दर्ज रहेगा।” प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सत्यपाल मलिक को किसानों की असली आवाज बताया और गहरी संवेदना जताई। सपा नेता आईपी सिंह ने लिखा, “देश की एक बेखौफ आवाज आज शांत हो गई। सत्यपाल मलिक जी को भावभीनी श्रद्धांजलि।”