इंदौर में 13 मौतों के पीछे की वजह सामने आई, लैब रिपोर्ट ने खोली दूषित पानी की परतें

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इंदौर में 13 मौतों के पीछे की वजह सामने आई, लैब रिपोर्ट ने खोली दूषित पानी की परतें
इंदौर में 13 मौतों के पीछे की वजह सामने आई, लैब रिपोर्ट ने खोली दूषित पानी की परतें

देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर इन दिनों एक गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। उल्टी-दस्त की महामारी के कारण अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1400 से अधिक लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। लैबोरेटरी जांच में यह साफ हो गया है कि इस बीमारी की जड़ पीने का दूषित पानी है। आठ साल से लगातार स्वच्छता में नंबर-1 रहने वाले शहर में इस तरह की घटना ने प्रशासन और आम लोगों—दोनों को झकझोर कर रख दिया है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई मरीज अब भी ICU में भर्ती हैं।

भागीरथपुरा से फैली बीमारी

इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने गुरुवार को बताया कि एक मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि भागीरथपुरा इलाके में पानी की पाइपलाइन में रिसाव के कारण सप्लाई दूषित हो गई थी। इसी क्षेत्र से उल्टी-दस्त की महामारी फैलनी शुरू हुई। हालांकि, उन्होंने रिपोर्ट के तकनीकी विवरण साझा नहीं किए।

अधिकारियों के अनुसार, भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य जल पाइपलाइन में लीकेज पाया गया। इसी स्थान के ऊपर एक शौचालय बना हुआ है। प्रशासन का मानना है कि इसी रिसाव के चलते सीवेज और पीने का पानी मिल गया, जिससे इलाके में बीमारी फैल गई।

सप्लाई बहाल, लेकिन उबालकर पानी पीने की सलाह

अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि भागीरथपुरा की पानी की पाइपलाइन की गहन जांच की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और भी लीकेज तो नहीं है। जांच के बाद गुरुवार को घरों में दोबारा साफ पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई है। हालांकि एहतियात के तौर पर नागरिकों को पानी पीने से पहले उसे अच्छी तरह उबालने की सलाह दी गई है।

दुबे ने यह भी कहा कि पानी के नए सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। भागीरथपुरा की घटना से सबक लेते हुए उन्होंने बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए पूरे मध्य प्रदेश में एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की जाएगी।

1714 घरों का सर्वे, हजारों की जांच

मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने खुद भागीरथपुरा पहुंचकर हालात का जायजा लिया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गुरुवार को इलाके के 1714 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें 8571 लोगों की स्वास्थ्य जांच हुई। इनमें से 338 लोगों में उल्टी-दस्त के हल्के लक्षण पाए गए, जिन्हें घर पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि महामारी के पिछले 8 दिनों में कुल 272 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से 71 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। फिलहाल 201 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 32 की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें ICU में रखा गया है।