भारत शिक्षा समिट में कानूनी शिक्षा पर विशेष सत्र आयोजित, सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस माहेश्वरी, AG वेंकटरमणी हुए शामिल

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गुरुवार को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में भारत शिक्षा समिट का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कई जानी मानी हस्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम में कानूनी शिक्षा और प्रशिक्षण थीम के साथ एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस जितेंद्र कुमार माहेश्वरी कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि जब तक आप better नहीं जानते अपना best दीजिए। जिस दिन बेस्ट जान जाएं, उस दिन बेस्ट दीजिए। जस्टिस माहेश्वरी ने कानूनी शिक्षा के लिए Critical thinking, analytic approach, social economic understanding को अहम बताया। जस्टिस माहेश्वरी ने कानूनी शिक्षा देने वाले संस्थानों में अच्छे शिक्षकों की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि AI आने वाले समय में चुनौती हो सकती है लेकिन खतरा नहीं।

एटर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि कानूनी शिक्षा के मामले में आपको एक बड़ी तस्वीर देखनी की जरूरत है कि आप आखिर जाना कहां चाहते हैं। आप दुनिया को कैसे बेहतर बना सकते हैं। इस तरह अपने प्रोफेशन में आप खुद को बेहतर बना सकते हैं।

सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत सभी को शिक्षा के लिए काम किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने कहा कि शिक्षा सभी के लिए जरूरी है। शिक्षा देश का भविष्य बनाती है। इसलिए शिक्षा को मजबूत करने की जरूरत है। हर छात्र कुछ अलग जानता है। हिंदी को थोपने की नहीं , रोपने की जरूरत है। हमें पूरी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करने की जरूरत है, विकसित करने की जरूरत है।

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली के वीसी जीएस बाजपेई ने कहा कि कानून के छात्रों को मुक्त रूप से चिंतन करना चाहिए, शिक्षा व्यवस्था मे नए विचारों की जरूरत है, नवाचार और उद्यमिता की आवश्यकता है, नया शोध करिए, कानून के प्रभाव पर अध्य्यन करने की जरूरत है। छात्र को रिसीवर नहीं एक एक्टिव एजेंट के रूप में देखा जाना चाहिए। हर व्यक्ति को अपना उद्देश्य अपना, अपनी योजना बनानी चाहिए। कानूनी शिक्षा में काम आने वाले एआई टूल्स भी छात्रों को सीखने की आवश्यकता है।

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी भोपाल के वीसी एस सूर्यप्रकाश भी कार्यक्रम में शामिल हुए।