
आज टेलीविजन पर कॉमेडी शोज़ की भरमार है। हर चैनल पर हंसी-मजाक से भरपूर कार्यक्रम मिल जाते हैं, लेकिन इनमें से कुछ ही ऐसे होते हैं जो समय की कसौटी पर खरे उतरते हैं और सालों बाद भी दर्शकों की यादों में ताजा बने रहते हैं। 90 के दशक में दूरदर्शन पर आया एक ऐसा ही यादगार शो था ‘श्रीमान श्रीमती’, जिसने भारतीय टीवी कॉमेडी को नई दिशा दी।
साल 1994 में शुरू हुआ यह शो अपनी सादगी, साफ-सुथरे हास्य और दमदार किरदारों के चलते देखते ही देखते घर-घर में लोकप्रिय हो गया। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 25 साल बाद इसे दोबारा री-टेलीकास्ट किया गया और इसके सीक्वल और रीबूट भी बनाए गए। आज भी जब क्लासिक कॉमेडी शोज़ की चर्चा होती है, तो ‘श्रीमान श्रीमती’ का नाम सबसे पहले लिया जाता है। कई दर्शकों की मानें तो इसके सामने बाद में आए कई कॉमेडी शोज़, यहां तक कि ‘भाबीजी घर पर हैं’ भी कुछ हद तक फीके नजर आते हैं।
क्या थी ‘श्रीमान श्रीमती’ की कहानी?
‘श्रीमान श्रीमती’ की कहानी बेहद साधारण थी, लेकिन यही इसकी सबसे बड़ी खूबी बन गई। यह शो दो पड़ोसी परिवारों के इर्द-गिर्द घूमता था। एक ओर थे केशव कुलकर्णी (जतिन कनकिया), जो अपनी पत्नी कोकीला (रीमा लागू) के साथ रहते थे। दूसरी ओर उनके पड़ोसी थे प्रेमा शालिनी (अर्चना पूरन सिंह) और उनके पति दिलरुबा (राकेश बेदी)।
कहानी में मज़ा तब आता है जब केशव को अपनी पड़ोसन प्रेमा से प्यार हो जाता है और दिलरुबा के दिल में कोकीला के लिए भावनाएं जाग उठती हैं। दोनों पतियों की अपनी-अपनी पड़ोसन को प्रभावित करने की नाकाम कोशिशों से पैदा होती हैं मजेदार गलतफहमियां और हास्यास्पद हालात। बिना किसी फूहड़पन के, सिर्फ मासूम कोशिशों और सिचुएशनल कॉमेडी के जरिए यह शो दर्शकों को हंसाने में कामयाब रहता था।
कलाकारों की दमदार परफॉर्मेंस
इस शो को यादगार बनाने में इसकी कास्ट की अहम भूमिका रही। जतिन कनकिया की कॉमिक टाइमिंग शो की जान थी। वहीं रीमा लागू ने एक सीधी-सादी, घरेलू पत्नी के किरदार को इतनी खूबसूरती से निभाया कि दर्शक उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ गए। अर्चना पूरन सिंह का ग्लैमरस और आत्मविश्वासी अंदाज शो का बड़ा आकर्षण था, जबकि राकेश बेदी ने दिलरुबा के किरदार में अपने एक्सप्रेशंस और डायलॉग डिलीवरी से हर सीन को और भी मजेदार बना दिया।
क्यों कहलाया फुल फैमिली कॉमेडी शो?
‘श्रीमान श्रीमती’ की सबसे बड़ी ताकत इसकी साफ-सुथरी कॉमेडी थी। इसमें न तो भद्दे मजाक थे और न ही डबल मीनिंग जोक्स। बच्चे, बड़े और बुज़ुर्ग – हर उम्र के लोग इसे साथ बैठकर देख सकते थे। इसके संवाद और सिचुएशनल ह्यूमर आज भी उतने ही असरदार लगते हैं।
यह शो करीब तीन साल तक चला और इसके कुल 143 एपिसोड प्रसारित हुए। साल 2005 में इसका सीक्वल ‘आज के श्रीमान श्रीमती’ बना, जबकि 2018 में इसका रीबूट ‘श्रीमान श्रीमती फिर से’ दर्शकों के सामने आया। 2020 में मूल शो को दोबारा टीवी पर दिखाया गया, जिसे नई पीढ़ी ने भी खूब पसंद किया।
दिलचस्प बात यह है कि बेहद लोकप्रिय शो ‘भाबीजी घर पर हैं’ भी इसी कॉन्सेप्ट से प्रेरित माना जाता है। IMDb पर ‘श्रीमान श्रीमती’ को 8.6 की शानदार रेटिंग मिली है, जो इसकी कालजयी लोकप्रियता का प्रमाण है। आज भी यह शो भारतीय टेलीविजन कॉमेडी के सुनहरे दौर की पहचान बना हुआ है।








