उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने सोमवार को लखनऊ स्थित लोकभवन सभागार में आयोजित मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह में प्रदेश के होनहार छात्र-छात्राओं को सम्मानित करते हुए सफलता का मूल मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए किसी शॉर्टकट की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि ईमानदार मेहनत, अनुशासन और सही दिशा में लगातार प्रयास ही सफलता की असली नींव हैं।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न शिक्षा बोर्डों की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल छात्रों की नहीं, बल्कि उनके परिवार, शिक्षकों और राज्य सरकार द्वारा स्थापित पारदर्शी एवं नकलमुक्त परीक्षा व्यवस्था की भी सफलता है।
223 राज्य स्तरीय और 1459 जिला स्तरीय टॉपर्स सम्मानित
समारोह में प्रदेश की मेरिट सूची में स्थान बनाने वाले 223 छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। वहीं सभी 75 जिलों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से 1459 जिला स्तरीय मेधावियों को भी सम्मानित किया जा रहा है।
सीएम योगी ने कहा कि यह सम्मान विद्यार्थियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो उन्हें भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि मेहनत का परिणाम हमेशा सुखद होता है और यह कार्यक्रम उसी सत्य का प्रमाण है।
छात्राओं ने फिर मारी बाजी
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से छात्राओं के प्रदर्शन की सराहना करते हुए बताया कि सम्मानित 223 विद्यार्थियों में 138 छात्राएं और 85 छात्र शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा दर्शाता है कि बेटियां लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
उन्होंने कहा, “बेटी पढ़ेगी तो आगे बढ़ेगी और देश व समाज को भी आगे बढ़ाएगी।” मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि शायद अब घरों में लड़के भी घरेलू कार्यों में अधिक सहयोग कर रहे हैं, इसलिए छात्राएं पढ़ाई में आगे निकल रही हैं।
बच्चों को स्मार्टफोन नहीं, रचनात्मक गतिविधियां दें
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने अभिभावकों को भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को चुप कराने के लिए स्मार्टफोन देना एक गंभीर गलती है। आज दो-तीन वर्ष की उम्र में ही बच्चे मोबाइल और वीडियो गेम्स के संपर्क में आ जाते हैं, जिसका नकारात्मक प्रभाव उनके मानसिक और सामाजिक विकास पर पड़ता है।
उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों, खेलकूद और अध्ययन से जोड़ें ताकि उनका समग्र विकास हो सके।
नकलमुक्त परीक्षा व्यवस्था से बदली तस्वीर
सीएम योगी ने कहा कि लगभग एक दशक पहले प्रदेश की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते थे और मेरिट सूची की विश्वसनीयता भी संदेह के घेरे में रहती थी। लेकिन पिछले नौ वर्षों में सरकार ने नकलमुक्त परीक्षाओं को सुनिश्चित कर शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है।
उन्होंने बताया कि आज माध्यमिक शिक्षा परिषद के लगभग 56 लाख विद्यार्थी समय पर परीक्षा देते हैं और रिकॉर्ड समय में परिणाम भी प्राप्त कर लेते हैं। इसके अलावा विद्यालयों के आधुनिकीकरण, डिजिटल लाइब्रेरी, अटल टिंकरिंग लैब और आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है।
सोशल मीडिया से दूरी, ज्ञान से दोस्ती
छात्रों को सलाह देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया पर सीमित समय ही व्यतीत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी प्रतियोगी परीक्षा या इंटरव्यू में आपके फॉलोअर्स की संख्या नहीं, बल्कि आपका ज्ञान, व्यक्तित्व और व्यवहारिक समझ मायने रखती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को समाचार पत्र पढ़ने, समसामयिक घटनाओं से जुड़े रहने और डिजिटल संसाधनों का सकारात्मक उपयोग करने की सलाह दी।
कृतज्ञता और आत्मविश्वास दोनों जरूरी
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि सफलता मिलने के बाद व्यक्ति को अपने माता-पिता, शिक्षकों, समाज और देश के प्रति कृतज्ञता का भाव बनाए रखना चाहिए। उन्होंने छात्रों से आत्मविश्वासी बनने का आह्वान किया, लेकिन साथ ही अति आत्मविश्वास से बचने की भी सलाह दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सीखने की प्रवृत्ति हमेशा जीवित रहनी चाहिए। जहां भी अच्छा ज्ञान मिले, उसे ग्रहण करने के लिए तैयार रहना चाहिए। यही सोच विद्यार्थियों को भविष्य में बड़ी सफलताओं तक पहुंचाएगी।








