संगीत, संस्कृति और शिक्षा के संगम का साक्षी बना भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का 16वां दीक्षांत समारोह बुधवार को लखनऊ के कैसरबाग स्थित कलामण्डपम् प्रेक्षागृह में आयोजित हुआ। समारोह में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के 23 मेधावी छात्र-छात्राओं को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण, रजत और कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व और सांस्कृतिक मूल्यों को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।
श्वेता गुप्ता रहीं समारोह का केंद्रबिंदु
एम.पी.ए. (कथक) की छात्रा श्वेता गुप्ता ने सर्वाधिक सात स्वर्ण पदक जीतकर समारोह की सबसे बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। वहीं एम.पी.ए. (कथक) की रूनझुन सिंह को दो रजत पदक तथा एम.पी.ए. (गायन) के छात्र स्पर्श कुमार कश्यप को तीन स्वर्ण और एक कांस्य पदक से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा बी.पी.ए. (कथक) की वल्लरी नारायण पाठक और तनिष्का सक्सेना को दो-दो पदक मिले। बी.पी.ए. (तबला) के छात्र आलोक कुमार मिश्रा ने चार पदक हासिल किए, जबकि गिटार विभाग की नेहा काजी को पांच स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। गायन विभाग की प्रिया दुबे को चार पुरस्कार और भरतनाट्यम की छात्रा दीप्ति सिंह को तीन स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। नाट्यकला में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए करतुम्म तरैया को पद्मश्री प्रो. राज बिसारिया स्वर्ण पदक दिया गया।
सामाजिक सरोकारों से जुड़ी पहलें भी रहीं आकर्षण
दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहा। विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों में आयोजित प्रतियोगिताओं के छह विजेताओं को सम्मानित किया गया। प्राथमिक विद्यालय कटिंगरा की प्रधानाचार्य पूजा सक्सेना और नम्रता मिश्रा को पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया गया।
कुलाधिपति की प्रेरणा से जनभवन स्कूल के बच्चों को पुस्तकें और लेखन सामग्री वितरित की गई। साथ ही चयनित जनपदों के पांच आंगनबाड़ी केंद्रों को 300 शैक्षणिक किट भी प्रदान की गईं। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की वार्षिक पत्रिका तथा प्रो. सृष्टि माथुर की पुस्तक ‘संगीत सृष्टि’ का विमोचन भी किया गया।
‘नेशन फर्स्ट’ की भावना से आगे बढ़ने का आह्वान
समारोह के मुख्य अतिथियों में शामिल प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए कहा कि वर्ष 1926 में एक छोटे संगीत विद्यालय के रूप में शुरू हुई यह संस्था आज देश के प्रमुख सांस्कृतिक विश्वविद्यालयों में अपनी पहचान बना चुकी है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष वितरित 28 पदक महिला विद्यार्थियों को मिले हैं, जो महिला सशक्तिकरण का सकारात्मक संकेत है।
उन्होंने विद्यार्थियों से ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना के साथ देश के विकास में योगदान देने का आह्वान करते हुए कहा कि युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा ही वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा विश्वविद्यालय
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. माण्डवी सिंह ने कहा कि संस्थान को समय-समय पर देश की प्रतिष्ठित विभूतियों का मार्गदर्शन मिलता रहा है। इसी सहयोग और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बल पर विश्वविद्यालय संगीत, नृत्य, नाट्य और संस्कृति के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।









