Stock Market Crash: अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात का असर गुरुवार (19 मार्च) को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। पूरे कारोबारी सत्र में दबाव में रहे बाजार ने अंत में भारी गिरावट के साथ कारोबार खत्म किया।
बीएसई सेंसेक्स 2,497 अंक गिरकर 74,207.24 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 775.65 अंक टूटकर 23,002.15 के स्तर पर आ गया। वहीं, बैंकिंग सेक्टर भी दबाव में रहा और निफ्टी बैंक 1875.05 अंक लुढ़ककर 53,451.00 पर बंद हुआ।
एक दिन पहले थी तेजी, अचानक बदला माहौल
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले यानी बुधवार को बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। सेंसेक्स 633.29 अंक (0.83%) चढ़कर 76,704.13 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 196.65 अंक की बढ़त के साथ 23,777.80 तक पहुंच गया था।
हालांकि, वैश्विक तनाव बढ़ने के साथ ही बाजार का रुख पूरी तरह पलट गया और गुरुवार को निवेशकों में घबराहट हावी हो गई।
सभी सेक्टरों में बिकवाली, ऑटो सबसे ज्यादा प्रभावित
बाजार में गिरावट व्यापक रही और लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली।
- ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई, जहां 4% से अधिक की गिरावट आई
- बैंकिंग, आईटी, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर भी 3-4% तक टूटे
इससे साफ है कि बाजार में सिर्फ चुनिंदा शेयर नहीं बल्कि पूरे बाजार पर दबाव बना रहा।
दिग्गज शेयरों में भी भारी गिरावट
कारोबार के अंत तक सेंसेक्स के लगभग सभी शेयर लाल निशान में आ गए।
- एटरनल के शेयरों में करीब 5.65% की गिरावट
- बजाज फिनसर्व करीब 5.42% टूटे
- महिंद्रा एंड महिंद्रा में 5.25% की गिरावट
- एचडीएफसी बैंक करीब 5.13% लुढ़का
- लार्सन एंड टुब्रो में 4.72% की कमजोरी
इन बड़ी कंपनियों में गिरावट ने बाजार के मूड को और कमजोर किया।
बाजार में बढ़ी वोलैटिलिटी और डर
आंकड़ों के अनुसार, कुल 3,072 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि केवल 999 शेयरों में बढ़त रही। यह आंकड़ा बाजार में व्यापक बिकवाली और निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।
साथ ही, बाजार में वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) भी काफी ऊंचे स्तर पर रही, जो अनिश्चितता का संकेत है।
क्या है गिरावट की बड़ी वजह?
विशेषज्ञों के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और ऊर्जा संकट की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, क्रूड ऑयल की कीमत 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। यह उछाल वैश्विक महंगाई और आर्थिक अस्थिरता को और बढ़ा सकता है।
भारत ही नहीं, जापान से लेकर दक्षिण कोरिया तक एशियाई बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। भारत में भी बाजार पर इसका असर पड़ा और सेंसेक्स खुलते ही करीब 1900 अंक टूट गया, जिससे निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया।
- तेल की कीमतों में उछाल
- वैश्विक सप्लाई चेन पर खतरा
- बड़े युद्ध की आशंका
इन सभी कारणों से निवेशकों ने जोखिम लेने से दूरी बनाई, जिसे बाजार की भाषा में “रिस्क एवर्शन” कहा जाता है।
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक हालात स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है। पश्चिम एशिया का घटनाक्रम अब आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।









