भारत की अर्थव्यवस्था ने जून 2025 तिमाही में दमदार प्रदर्शन किया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 7.8% की रफ्तार से बढ़ा है। यह न सिर्फ पिछली तिमाही की 7.4% ग्रोथ से बेहतर है, बल्कि पिछले साल इसी अवधि की 6.5% वृद्धि को भी पीछे छोड़ती है। खास बात यह है कि यह विकास दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 6.5% अनुमान से भी अधिक रही। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में पहली तिमाही के लिए 6.5%, दूसरी के लिए 6.7%, तीसरी के लिए 6.6% और चौथी के लिए 6.3% ग्रोथ का अनुमान जताया था।
क्यों मजबूत रही ग्रोथ?
पीटीआई के अनुसार, यह तेज़ी अमेरिकी टैरिफ लागू होने से पहले की स्थिति को दर्शाती है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के शुक्रवार को जारी आंकड़ों से पता चलता है कि कृषि क्षेत्र ने बड़ी भूमिका निभाई। खेती-किसानी ने अप्रैल-जून 2025 में 3.7% की ग्रोथ दर्ज की, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह सिर्फ 1.5% थी। सरकार का कहना है कि अर्थव्यवस्था मजबूत राह पर है, लेकिन मानसून और वैश्विक हालात पर नज़र बनी हुई है।
भारत सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था
भारत ने एक बार फिर साबित किया कि वह दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। तुलना करें तो चीन की GDP ग्रोथ इसी अवधि में 5.2% रही। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने भी मामूली सुधार दिखाते हुए 7.7% की ग्रोथ दर्ज की, जो पिछले साल 7.6% थी। इससे पहले जनवरी-मार्च 2024 में सबसे ऊंची 8.4% वृद्धि दर्ज हुई थी।
RBI का अनुमान पीछे छूटा
आरबीआई ने हाल ही में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 6.5% ग्रोथ का अनुमान जताया था। लेकिन अप्रैल-जून की 7.8% वृद्धि ने इस अनुमान को पीछे छोड़ दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है, हालांकि आगे वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिका के भारी टैरिफ का असर देखने को मिल सकता है।