आपके हाथ में आने वाला प्लास्टिक का एक छोटा सा कार्ड — क्रेडिट कार्ड — जीवन को बेहद आसान बना देता है। चाहे शॉपिंग करनी हो, बिल चुकाना हो या अचानक पैसे की ज़रूरत पड़ जाए, यह तुरंत मदद करता है। लेकिन इस सुविधा की एक कीमत है, जो महीने के अंत में आपके क्रेडिट कार्ड बिल के रूप में सामने आती है। और यहीं कई लोग ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो उन्हें लंबे समय तक वित्तीय परेशानी में डाल सकती हैं।
अगर आपने बिल में लिखी इन 5 अहम बातों को नज़रअंदाज़ कर दिया, तो समझिए आपके जेब से पैसा ऐसे निकलेगा कि आपको पता भी नहीं चलेगा। आइए जानते हैं किन बातों पर ध्यान देना ज़रूरी है—
- ‘मिनिमम अमाउंट ड्यू’ का छलावा
बिल में आमतौर पर दो रकम लिखी होती हैं — Total Amount Due (कुल बकाया) और उसके नीचे Minimum Amount Due (न्यूनतम देय राशि)। बहुत से लोग सोचते हैं कि सिर्फ मिनिमम अमाउंट भर देने से काम चल जाएगा।
असल में, मिनिमम अमाउंट का भुगतान करने से आप लेट पेमेंट फीस से तो बच जाएंगे, लेकिन भारी ब्याज से नहीं। बची हुई पूरी रकम पर बैंक ऊंची ब्याज दर से चार्ज लगाना शुरू कर देता है।
उदाहरण:
कुल बिल: ₹20,000
मिनिमम अमाउंट (लगभग 5%): ₹1,000
आपने चुकाया: ₹1,000
बकाया: ₹19,000
यहां असली खेल यह है कि ब्याज केवल ₹19,000 पर नहीं, बल्कि पूरी खरीद की तारीख से ₹20,000 पर लगना शुरू हो जाता है।
- ब्याज (Finance Charges) को न समझना
क्रेडिट कार्ड का ब्याज किसी पर्सनल लोन से भी कई गुना ज्यादा होता है — सालाना 36% से 48% तक। जैसे ही आप ड्यू डेट तक पूरा भुगतान नहीं करते, आपका Interest-Free Period खत्म हो जाता है।
अब बैंक:
पुरानी खरीद पर खरीद की तारीख से ब्याज लगाएगा।
नई खरीद पर भी पहले दिन से ब्याज लेना शुरू कर देगा।
यानी एक बार चूक गए तो बिल का बढ़ना रुकना मुश्किल हो जाता है।
- बिलिंग साइकिल और ड्यू डेट में भ्रम
Billing Cycle: 30 दिन की अवधि जिसमें आपके खर्च जोड़े जाते हैं, जैसे 10 अगस्त से 9 सितंबर।
Payment Due Date: बिल बनने के बाद की अंतिम भुगतान तारीख, जो आमतौर पर 15-20 दिन बाद होती है।
फायदा कैसे उठाएं:
अगर आप बिलिंग साइकिल की शुरुआत में बड़ी खरीद करते हैं, तो उसे चुकाने के लिए लगभग 50 दिन का ब्याज-मुक्त समय मिल सकता है।
- छिपे चार्ज और फीस को नजरअंदाज करना
बिल में सिर्फ ब्याज ही नहीं, बल्कि कई और शुल्क भी होते हैं:
लेट पेमेंट फीस: ड्यू डेट तक मिनिमम अमाउंट भी न चुकाने पर ₹500-₹1200 या अधिक।
ओवर-लिमिट फीस: क्रेडिट लिमिट से अधिक खर्च पर।
कैश एडवांस फीस: ATM से नकदी निकालने पर, जिस पर पहले दिन से ब्याज लगता है।
GST: ब्याज और फीस पर 18% GST अलग से।
- क्रेडिट स्कोर पर असर भूल जाना
बार-बार देरी से भुगतान या सिर्फ मिनिमम अमाउंट देने से आपका CIBIL स्कोर गिरता है। नतीजा — भविष्य में लोन लेना मुश्किल या ऊंची ब्याज दर पर संभव होगा।
FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1: अगर पूरा बिल नहीं चुका सकता तो?
➡️ जितना संभव हो उतना भुगतान करें। बैंक से EMI विकल्प लें, जिसकी ब्याज दर कम होगी।
Q2: एक बार लेट होने से क्या फर्क पड़ता है?
➡️ एक-दो दिन की देरी से खास फर्क नहीं, लेकिन आदत बन गई तो स्कोर पर बड़ा असर।
Q3: इंटरेस्ट-फ्री पीरियड क्या है?
➡️ खरीद की तारीख से ड्यू डेट तक का समय, जब तक पिछला बिल पूरा चुकाया हो।
Q4: फाइनेंस चार्ज और लेट फीस में क्या अंतर है?
➡️ लेट फीस फिक्स्ड पेनल्टी है, फाइनेंस चार्ज बकाया रकम पर ब्याज।
Q5: क्या कैश निकालना सही है?
➡️ बिल्कुल नहीं। यह सबसे महंगा ट्रांजैक्शन है, जिस पर पहले दिन से भारी ब्याज लगता है।