उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन विभाग ने पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत एक नई पहल शुरू की है। गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) से पहले प्रदेशभर में चार विशेष थीम आधारित वन—समृद्धि वन, कपि वन, ऊर्जा वन और समरस वन—स्थापित किए जाएंगे। 18 से 27 जुलाई के बीच चरणबद्ध तरीके से इन वनों का विकास किया जाएगा। इन अभियानों को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से भी जोड़ा गया है, ताकि अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
वन विभाग का मानना है कि इन विशिष्ट वनों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने, मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने जैसे बहुआयामी उद्देश्यों को पूरा किया जा सकेगा।
18 जुलाई: किसानों की आय बढ़ाने के लिए बनेगा ‘समृद्धि वन’
अभियान की शुरुआत 18 जुलाई को समृद्धि वन की स्थापना से होगी। प्रदेश के प्रत्येक विकास खंड में कम से कम एक हेक्टेयर क्षेत्र में इस वन को विकसित किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य कृषि वानिकी (Agroforestry) को बढ़ावा देना और किसानों को कार्बन क्रेडिट सहित अतिरिक्त आय के नए अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए कृषि भूमि पर चिन्हित स्थानों पर पौधरोपण किया जाएगा और कृषि विभाग भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएगा।
21 जुलाई: शहरों में मानव-वानर संघर्ष कम करेगा ‘कपि वन’
21 जुलाई को प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों, नगर पालिकाओं और पंचायत क्षेत्रों में कपि वन विकसित किए जाएंगे। इन वनों का उद्देश्य शहरों में बढ़ते मानव-वानर संघर्ष को कम करना है।
शहरों की सीमा से बाहर फलदार वृक्षों का रोपण किया जाएगा ताकि वानरों को प्राकृतिक भोजन उपलब्ध हो सके और उनका रिहायशी इलाकों की ओर रुख कम हो। इस वन में आम, जामुन, अमरूद, बेल, कटहल, शहतूत, पीपल, गुलर, अंजीर, बेर और बड़हल जैसी फलदार प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे।
23 जुलाई: ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखकर बनेगा ‘ऊर्जा वन’
23 जुलाई को प्रत्येक विकास खंड में ऊर्जा वन स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जलाऊ लकड़ी की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करना और प्राकृतिक वनों पर दबाव कम करना है।
वन विभाग के अनुसार, वनों के आसपास रहने वाले ग्रामीण परिवार प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में जलाऊ लकड़ी का उपयोग करते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए सिरस, बबूल, सुबबूल, पॉपलर, कदंब और अन्य तेजी से बढ़ने वाली प्रजातियों का रोपण किया जाएगा। इस अभियान में ग्राम्य विकास और पंचायती राज विभाग भी सहयोग करेंगे।
27 जुलाई: सामाजिक एकता का संदेश देगा ‘समरस वन’
अभियान के अंतिम चरण में 27 जुलाई को समरस वन की स्थापना की जाएगी। इसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को एक मंच पर लाकर सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
जनपद, तहसील और विकास खंड स्तर पर पौधरोपण के साथ संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें समाज कल्याण विभाग भी सक्रिय भागीदारी निभाएगा। इस पहल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक सहभागिता से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
जनभागीदारी से हरित उत्तर प्रदेश की ओर कदम
मुख्य वन संरक्षक (प्रचार-प्रसार) अदिति शर्मा के अनुसार, इन चारों विशिष्ट वनों की स्थापना के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वन विभाग के साथ कृषि, ग्राम्य विकास, पंचायती राज और समाज कल्याण विभाग मिलकर इस अभियान को सफल बनाएंगे।
सरकार का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देना है। यदि आमजन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होती है तो यह अभियान हरित उत्तर प्रदेश के निर्माण और जलवायु संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।









