UP News: वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत पूरे प्रदेश में 36,103 विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए विभिन्न जनपदों के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सूचीबद्ध प्रशिक्षण प्रदाताओं की नियुक्ति की गई है। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को उद्योगों की मांग के अनुरूप व्यावहारिक दक्षता प्रदान करना है।
आईटी से लेकर कृषि तक कई क्षेत्रों में मिलेगा प्रशिक्षण
योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को आईटी एवं आईटीईएस, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, अपैरल, ब्यूटी एंड वेलनेस, मैनेजमेंट, ग्रीन जॉब्स और एग्रीकल्चर जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक पाठ्यक्रम की अधिकतम अवधि 300 घंटे निर्धारित की गई है, ताकि छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ पर्याप्त व्यावहारिक अनुभव भी मिल सके।
35 छात्रों से अधिक नहीं होगा एक बैच
प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सरकार ने प्रत्येक बैच में अधिकतम 35 प्रशिक्षणार्थियों की सीमा तय की है। इससे प्रशिक्षकों को प्रत्येक विद्यार्थी पर बेहतर ध्यान देने का अवसर मिलेगा और प्रयोगात्मक शिक्षा अधिक प्रभावी होगी।
15 जुलाई तक हर हाल में शुरू करनी होंगी कक्षाएं
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी प्रशिक्षण प्रदाताओं को केंद्रों का पंजीकरण, बैच निर्माण और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर 15 जुलाई 2026 तक प्रशिक्षण शुरू करना अनिवार्य होगा। बैच शुरू होने के सात कार्य दिवस के भीतर विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री वितरित करनी होगी तथा उसका रिकॉर्ड मिशन पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई प्रशिक्षण प्रदाता तय समयसीमा का पालन नहीं करता या उसके खिलाफ जनपद स्तर पर शिकायत प्राप्त होती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। मिशन का उद्देश्य केवल लक्ष्य पूरा करना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण सुनिश्चित करना है।
पढ़ाई के साथ रोजगार की तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालय स्तर पर कौशल आधारित शिक्षा विद्यार्थियों को भविष्य की रोजगार चुनौतियों के लिए तैयार करेगी। यह पहल राष्ट्रीय कौशल विकास की अवधारणा को भी मजबूत करेगी और युवाओं को उच्च शिक्षा के साथ-साथ रोजगार एवं उद्यमिता के बेहतर अवसर उपलब्ध कराएगी।








