UP News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (Regional Meteorological Centre) की स्थापना के साथ मौसम पूर्वानुमान, कृषि प्रबंधन और आपदा नियंत्रण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को संयुक्त रूप से इस केंद्र का उद्घाटन किया। लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र को उन्नत कर क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का स्वरूप दिया गया है, जिससे उत्तर प्रदेश समेत आसपास के क्षेत्रों को अधिक सटीक और त्वरित मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जा सकेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मौसम संबंधी वैज्ञानिक जानकारी केवल पूर्वानुमान का विषय नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और आर्थिक विकास से सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य है और देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे में मौसम की सटीक जानकारी उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है।
किसानों के लिए वरदान साबित होगा नया केंद्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की कुल कृषि योग्य भूमि का लगभग 11 प्रतिशत हिस्सा रखता है, लेकिन खाद्यान्न उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी कहीं अधिक है। राज्य के किसान मौसम पर अत्यधिक निर्भर रहते हैं। यदि समय पर बारिश, सूखा, ओलावृष्टि या अत्यधिक वर्षा की जानकारी उपलब्ध हो जाए तो किसान अपनी फसल को सुरक्षित रखने के लिए पहले से तैयारी कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि मौसम विज्ञान केंद्र की नई व्यवस्था किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करेगी और कृषि उत्पादन को अधिक सुरक्षित तथा लाभकारी बनाएगी। मौसम आधारित कृषि योजनाओं को लागू करने में भी यह केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मौसम पूर्वानुमान में 12 वर्षों में आया बड़ा बदलाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में मौसम विज्ञान और आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली के क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार हुए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय ऐसा था जब मौसम विभाग के पूर्वानुमान अक्सर वास्तविक परिस्थितियों से मेल नहीं खाते थे। लेकिन आधुनिक तकनीक, उपग्रहों, रडार नेटवर्क और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के कारण अब मौसम संबंधी सूचनाएं कहीं अधिक सटीक और भरोसेमंद हो गई हैं।
योगी ने कहा कि आज मौसम विभाग द्वारा दी जा रही जानकारी किसानों, प्रशासन और आम नागरिकों के लिए प्रभावी साबित हो रही है।
अर्ली वार्निंग सिस्टम ने बचाई हजारों जानें
मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन में अर्ली वार्निंग सिस्टम की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में प्रदेश में आकाशीय बिजली, आंधी और भारी बारिश जैसी घटनाओं से होने वाली जनहानि में उल्लेखनीय कमी आई है।
उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले प्रदेश के कई जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से हर वर्ष बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती थी। लेकिन आधुनिक चेतावनी प्रणाली लागू होने के बाद अब ऐसी घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
सीएम ने बताया कि मोबाइल अलर्ट सिस्टम के जरिए लोगों को आपदा आने से कई घंटे पहले चेतावनी भेजी जाती है, जिससे वे सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सकते हैं।
सहारनपुर की घटना का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने हाल ही में सहारनपुर के शाकम्भरी देवी क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ जैसी स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि मौसम विभाग की समय पर मिली चेतावनी ने बड़ी जनहानि को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने बताया कि शिवालिक क्षेत्र में हुई भारी वर्षा के कारण अचानक जल प्रवाह बढ़ गया था। उस समय मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे, लेकिन समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
यूपी को चाहिए अपना मौसम सैटेलाइट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसा विशाल और कृषि प्रधान राज्य अपना विशेष मौसम निगरानी सैटेलाइट विकसित करना चाहता है।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से भी चर्चा की गई है। यदि राज्य को अपना समर्पित सैटेलाइट मिलता है तो मौसम संबंधी सूचनाओं की सटीकता और अधिक बढ़ेगी, जिससे किसानों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और प्रशासन को बड़ा लाभ मिलेगा।
जलवायु परिवर्तन पर जताई चिंता
मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन (Climate Change) को वर्तमान समय की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि मौसम चक्र में अब लगभग एक महीने तक का बदलाव दिखाई देने लगा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में खाद्यान्न उत्पादन और जल संसाधनों पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि मानव समाज को प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझना होगा और पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाना होगा।
आधुनिक तकनीक से मजबूत होगा मौसम नेटवर्क
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में मौसम निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर आधुनिक उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में 450 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और लगभग 2000 ऑटोमेटिक रेनगेज कार्यरत हैं।
इसके अतिरिक्त लखनऊ, वाराणसी, झांसी, अलीगढ़ और आजमगढ़ में आधुनिक एक्स-बैंड डॉप्लर वेदर रडार स्थापित किए जा रहे हैं। ये रडार आंधी, तूफान, भारी वर्षा और ओलावृष्टि जैसी घटनाओं की सटीक निगरानी करने में सक्षम होंगे।
आकाशीय बिजली की पहचान करने वाले विशेष सेंसर भी विभिन्न क्षेत्रों में लगाए गए हैं, जिनकी सहायता से समय रहते चेतावनी जारी की जा सकती है।
कृषि और अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि, बागवानी और सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं रखता है। राज्य में लगभग 86 प्रतिशत कृषि भूमि सिंचित है और अधिकांश किसान वर्ष में दो से तीन फसलें उगाते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि आधुनिक तकनीक, मौसम पूर्वानुमान और वैज्ञानिक खेती को एक साथ जोड़ा जाए तो उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में नई ऊंचाइयों को छू सकता है। इसके लिए मौसम विभाग, वैज्ञानिक संस्थान और राज्य सरकार मिलकर कार्य करेंगे।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि लखनऊ में स्थापित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे उत्तरी भारत के लिए मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण केंद्र साबित होगा। यह केंद्र किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली क्षति कम करने और विकसित भारत के लक्ष्य को वैज्ञानिक आधार प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।









