उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्तियों को लेकर मुख्यमंत्री सीएम योगी ने एक बार फिर पारदर्शिता और योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया पर जोर दिया। गुरुवार को लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने आयुष विभाग, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग तथा दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के लिए चयनित 481 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “मिशन रोजगार” विजन के तहत लगातार युवाओं को रोजगार उपलब्ध करा रही है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश में 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है और पूरी भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया गया है।
‘अब नौकरी के लिए सिफारिश की जरूरत नहीं’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले सरकारी नौकरियों में जाति, क्षेत्र, पैसे और सिफारिश का प्रभाव देखने को मिलता था, जिससे योग्य युवाओं के साथ अन्याय होता था। लेकिन अब उत्तर प्रदेश में केवल योग्यता ही चयन का आधार है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार, पेपर लीक और अनियमितताओं को खत्म करने के लिए शुरुआत से ही सख्त कदम उठाए। तकनीक और जवाबदेही के जरिए यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी स्तर पर अनुचित हस्तक्षेप की गुंजाइश न रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी योग्य उम्मीदवार की जगह रिश्वत या सिफारिश के दम पर कोई व्यक्ति व्यवस्था में आ जाता है, तो वह वर्षों तक पूरे सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है।
15 दिनों में चौथा नियुक्ति कार्यक्रम
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 15 दिनों के भीतर यह चौथा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि पहले कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि उत्तर प्रदेश में इतनी बड़ी संख्या में निष्पक्ष सरकारी भर्तियां संभव होंगी।
सरकार ने अलग-अलग आयोगों और भर्ती बोर्डों को स्पष्ट जवाबदेही दी है, जिससे भर्ती प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनी है।
‘बदली यूपी की पहचान’
सीएम योगी ने अपने संबोधन में 2017 से पहले और वर्तमान उत्तर प्रदेश की तुलना भी की। उन्होंने कहा कि पहले यूपी की पहचान भ्रष्टाचार, अराजकता और गुंडाराज से जुड़ी थी। देश और दुनिया में लोग उत्तर प्रदेश का नाम सुनकर संदेह की नजर से देखते थे।
लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। मुख्यमंत्री के मुताबिक आज उत्तर प्रदेश निवेश, रोजगार, कानून व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नई पहचान बना चुका है।
अर्थव्यवस्था और रोजगार में बड़ी छलांग
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पिछले वर्षों में उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय, वार्षिक बजट और समग्र अर्थव्यवस्था को लगभग तीन गुना करने में सफलता हासिल की है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब देश की अर्थव्यवस्था का “ग्रोथ इंजन” बन रहा है। राज्य में एक्सप्रेसवे, औद्योगिक निवेश और एमएसएमई सेक्टर में तेजी से विकास हुआ है।
मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में इस समय करीब 96 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जिनमें 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
उद्योगों का बढ़ा निवेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में उद्योगों की स्थिति कमजोर थी, लेकिन अब निवेश का माहौल पूरी तरह बदल गया है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष प्रदेश में 4000 से अधिक बड़े उद्योग आए, जबकि बीते 9 वर्षों में बड़े उद्योगों की संख्या 14 हजार से बढ़कर 32 हजार से अधिक हो चुकी है।
कार्यक्रम में कई मंत्री रहे मौजूद
इस अवसर पर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव कपिल देव अगरवाल, नरेंद्र कुमार कश्यप और दयाशंकर मिश्रा (Dayashankar Mishra) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और विभागीय प्रतिनिधि मौजूद रहे।
लोकभवन में आयोजित यह कार्यक्रम केवल नियुक्ति पत्र वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकार की उस नीति को भी सामने लेकर आया जिसमें भर्ती प्रक्रिया को “सिफारिश और भ्रष्टाचार” से मुक्त कर “योग्यता आधारित चयन” की दिशा में आगे बढ़ाने का दावा किया जा रहा है।
प्रदेश सरकार इसे उत्तर प्रदेश की बदलती कार्यसंस्कृति और प्रशासनिक सुधारों का उदाहरण बता रही है।









