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अंधा प्रेम तानाशाही का रूप ले लेता है
‘’अंधा प्रेम ही रिश्तों में तानाशाही को जन्म देता है’’, लेखक ज्ञान चतुर्वेदी अपने उपन्यास ‘एक तानाशाह की प्रेमकथा’ की भूमिका में यह लिखते...
‘पागलखाना’ में बाजार का असली चेहरा दिखाने का प्रयास करते हैं...
''यह सोच सत्ता का भोलापन था, कमीनापन था काइयांपन, पता नहीं, पर यह स्पष्ट था कि सरकार बाज़ार के साथ मिल गई थी…", लेखक...