उत्तर प्रदेश पुलिस की सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। लखनऊ के रिजर्व पुलिस लाइन में चल रहे डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (DV) और फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST) के दौरान, एक अभ्यर्थी को फर्जी मार्कशीट लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए अभ्यर्थी का नाम हर्षित मिश्रा है, जो उन्नाव जिले के बांगरमऊ स्थित न्यू कटरा का निवासी है।
पुलिस के अनुसार, अभ्यर्थी ने अपनी 12वीं कक्षा की फर्जी मार्कशीट प्रस्तुत की थी। परीक्षण के दौरान दस्तावेजों की गहराई से जांच करने पर गड़बड़ी सामने आई। इस गड़बड़ी की सूचना तत्काल जांच में लगे दरोगा सुरेश चंद्र आजाद ने महानगर कोतवाली में दी, जिसके आधार पर हर्षित मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज की गई। FIR में भारतीय दंड संहिता की धारा 318(4), 336(3), और 340(2) के तहत मामला दर्ज किया गया।
गिरफ्तारी कैसे हुई?
रिजर्व पुलिस लाइन में दस्तावेज सत्यापन और शारीरिक परीक्षण का कार्य उच्च सतर्कता के साथ चल रहा था। जब अभ्यर्थी हर्षित मिश्रा के प्रमाणपत्रों को सत्यापित किया गया, तो यह पाया गया कि उसकी 12वीं की मार्कशीट फर्जी है। इस पर पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की। पूछताछ में हर्षित ने फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने की बात स्वीकार की।
भर्ती प्रक्रिया पर असर
यह घटना 2023 की सिपाही भर्ती प्रक्रिया के दौरान सामने आई है, जो पूरे उत्तर प्रदेश में चल रही है। इस प्रक्रिया के तहत DV और PST परीक्षण सभी जिलों की रिजर्व पुलिस लाइनों में आयोजित किए जा रहे हैं। इस फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद, पुलिस ने सभी दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया को और कड़ा कर दिया है।
अधिकारी क्या कह रहे हैं?
महानगर कोतवाली में दर्ज FIR के बाद, पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जाएगा।
पुलिस ने यह भी कहा कि इस घटना से अन्य अभ्यर्थियों के लिए यह एक चेतावनी है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का फर्जीवाड़ा स्वीकार्य नहीं होगा। दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
भर्ती प्रक्रिया का उद्देश्य
2023 की सिपाही भर्ती प्रक्रिया का उद्देश्य उत्तर प्रदेश पुलिस बल को मजबूत करना और योग्य अभ्यर्थियों का चयन करना है। इस भर्ती में लाखों उम्मीदवार भाग ले रहे हैं, और इस तरह के मामले प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर सकते हैं।