पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पंचतत्व में विलीन, अंतिम संस्कार में राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी रहे मौजूद

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पंचतत्व में विलीन
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पंचतत्व में विलीन

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार पूरी राजकीय सम्मान के साथ किया गया और वह अब पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। उनका योगदान भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में हमेशा याद रहेगा। उनके अंतिम संस्कार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कई अन्य हस्तियां मौजूद थीं।

कांग्रेस मुख्यालय में अंतिम दर्शन

डॉ. मनमोहन सिंह का पार्थिव शरीर सुबह करीब 8:30 बजे कांग्रेस मुख्यालय ’24 अकबर रोड’ पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। यहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य पार्टी नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मनमोहन सिंह का पार्थिव शरीर उनके आवास से कांग्रेस मुख्यालय लाया गया, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

मनमोहन सिंह की अंतिम यात्रा

कांग्रेस मुख्यालय से डॉ. सिंह की अंतिम यात्रा निगमबोध घाट के लिए शुरू हुई। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता नारे लगाते हुए चल रहे थे, “जब तक सूरज चांद रहेगा, मनमोहन आपका नाम रहेगा” और “मनमोहन सिंह अमर रहें।” राहुल गांधी भी अंतिम यात्रा के मुख्य वाहन में बैठे नजर आए।

विदाई में राष्ट्रपति और पीएम की उपस्थिति

पूर्व प्रधानमंत्री के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ता कतारबद्ध थे। सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने डॉ. सिंह को अंतिम विदाई दी। उनके परिवार के सदस्य भी इस अवसर पर मौजूद थे, और उनकी पत्नी गुरशरण कौर ने पुष्प अर्पित कर अपने पति को अंतिम विदाई दी।

निगमबोध घाट पर अंतिम संस्कार

डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार निगमबोध घाट पर हुआ, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें राष्ट्रगान गाकर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान कांग्रेस ने सरकार से सवाल उठाया था कि डॉ. सिंह का अंतिम संस्कार ऐसे स्थान पर किया गया, जहां उनका स्मारक नहीं बन सकता था। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे जानबूझकर किया गया अपमान बताया था।

मनमोहन सिंह का योगदान

डॉ. मनमोहन सिंह, जो भारत के पहले सिख प्रधानमंत्री थे, 2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। इसके पहले, उन्होंने वित्त मंत्री के रूप में भारत की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया था। 1991 में उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए थे, जो आज भी उनके योगदान के रूप में याद किए जाते हैं। उनके नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण योजनाएं जैसे सूचना का अधिकार (आरटीआई), शिक्षा का अधिकार (आरटीई) और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) लागू की गईं।