अंकिता भंडारी हत्याकांड पर उबाल: न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर जनआक्रोश, BJP–Congress के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज

0
0

उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर जन आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। देहरादून से लेकर चंपावत तक सड़कों पर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। एक ओर आम लोग और विभिन्न राजनीतिक दल अंकिता को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर सीधी राजनीतिक जंग छिड़ गई है।

मुख्यमंत्री आवास कूच, बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश

राजधानी देहरादून में सर्वदलीय प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन भारी पुलिस बल ने उन्हें दूसरी घेराबंदी से पहले ही रोक लिया। पूरे प्रदर्शन के दौरान “अंकिता भंडारी को न्याय दो” और “वीआईपी नाम का खुलासा करो” जैसे नारे गूंजते रहे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मामले में सीबीआई जांच नहीं कराई गई, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

चंपावत में बीजेपी का कांग्रेस पर हमला

वहीं चंपावत में बीजेपी ने कांग्रेस पर अंकिता भंडारी के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। रोडवेज स्टेशन से नगर तक निकाले गए जुलूस के बाद कांग्रेस का पुतला फूंका गया। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस भ्रम फैलाकर जनता को गुमराह कर रही है। इस प्रदर्शन में भाजपा के विभिन्न मोर्चों और प्रकोष्ठों के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल रहे।

देहरादून में बड़ा विरोध, पुतला दहन

इसी बीच देहरादून में भी अंकिता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार से पूरे मामले को स्पष्ट करने की मांग की। जवाब में बीजेपी ने कांग्रेसी नेताओं का पुतला दहन किया। कांग्रेस का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक दल का नहीं, बल्कि एक बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई है, और अब जब सत्ता पक्ष के नेताओं के नाम सामने आने लगे हैं, तो ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।

पूरे राज्य में एक बात स्पष्ट है—अंकिता भंडारी हत्याकांड ने उत्तराखंड की राजनीति और समाज दोनों को झकझोर कर रख दिया है। सड़कों पर उतरा जन आक्रोश यह संकेत दे रहा है कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई और मामले की पारदर्शी जांच नहीं होती, तब तक यह मुद्दा शांत होने वाला नहीं है।